अद्भुत है सुरसंड के रानी मंदिर का इतिहास।

मुग़ल काल में राजा सुर सेन द्वारा स्थापित किआ गया राज्य सुरसंड वर्तमान में सीतामढ़ी जिले में  प्रखंड मुख्यालय है। देश को चर्चित हस्तियां देने वाला ये शहर सीतामढ़ी में प्राचीन मंदिरों का समागम है। इन्ही प्राचिन्ताओं में सबसे भव्य है रानी मंदिर।

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रानी मंदिर, सुरसंड की मनोरम तस्वीर .
Front Entrance
मंदिर का पूर्वी प्रवेश द्वार, परित्यक्त।
ancient bricks used for the construction
निर्माण में प्रयोग किये गए ईंट का नमूना और निर्माण शैली।

सुरसंड के मुख्य बाज़ार से नेपाल जाने वाली सड़क पर बाएं तरफ अवस्थित इस मंदिर का निर्माण सन् 1700 के आसपास रानी श्रीमती धन्वंतरि कुंवर के द्वारा की गयी थी। तीन गुम्बजों वाला यह मंदिर मिथिला के वास्तुशिल्प का अनोखा उदहारण है। इसके निर्माण में पतली ईंटें , सुर्खी , पत्थर , दाल एवं मिट्टी का इस्तेमाल किया गया था।  मंदिर के पश्चिमी भाग में चार लोगों की मूर्ति बनाई हुई है  जिसमें एक की एक हाथ कटी हुई है , दूसरे के दोनों हाथ और पैर दोनों कटे हुए हैं तीसरे की दोनों  दोनों पैर कटी हुई है

wall depicting the masions.
पैर एवं हाथ कटी हुयी मूर्तियाँ.

मंदिर के शीर्ष पर कलश स्थापित है, जो पित्तल से बना है और सोने की परत चढ़ी हुयी है. मंदिर के आगरा भाग में धोलपुर के पत्थर का इस्तेमाल किआ गया है. सोचा जा सकता है की ३०० वर्ष पहले वहां से पत्थर लाकर बनाना कितना मुश्किल रहा होगा.

गर्भगृह प्रवेश के बाहर धौलपुर पत्थर की दिवार।
गर्भगृह प्रवेश के बाहर धौलपुर पत्थर की दिवार।
Column in dholpur stone
धौलपुर पत्थर में बना स्तम्भ।

मंदिर बनने के बाद   90 साल बाद तक इसका प्रयोग किया गया ,पूजा अर्चना होती रही उसके बाद रानी धन्वंतरी कुंवर  के परिवार का शासन कमजोड़ होता चला गया और पूजा अर्चना बंद हो गयी। मंदिर खंडहर में तब्दील हो गया, भगवन की मूर्तियां चोरी हो गयी और आसपास जंगल बन गया। पांच गुम्बदों में से एक गुम्बद भी ढह गया। जंगल होने के वजह से यह नाग देवता का शरण स्थल भी बन गया। आज भी यहाँ नाग देवता का साक्षात दर्शन कुछ ही पल में किआ जा सकता है। आजतक नाग देवता ने किसी के ऊपर कोई हमला नही किआ है और स्थानीय लोगों ने भी कभी किसी नाग देवता को नही छेड़ा है।

गर्भगृह।
गर्भगृह।

आज मंदिर में पुनः पूजा अर्चना शुरू हो चुकी है, जिसका श्रेय ग्रामीणों और श्री शोभित राउत को जाता है। इन्होंने 15 साल पहले यहाँ से जंगल हटा कर , मंदिर को पुनर्जीवित किआ था। इन सभी की सरकार से बहुत अपेक्षाएं हैं मगर सरकार का कोई सहयोग आज तक नही मिला।  उम्मीद है इस लेख के माध्यम से पुरातत्व विभाग, बिहार सरकार और भारत सरकार का ध्यान आकृष्ट कर पाऊंगा।

9 thoughts on “अद्भुत है सुरसंड के रानी मंदिर का इतिहास।

  1. Achhi jankari gumbad 5 hain bich walav1987 ke bhukamp me fir gya. Ye Bihar sarkar ke adhin nahi hai ye neeji sampati hai sir in Dino ispar avaidh nirman karakar uske sundarta ko dhumil kiya ja raha hai.

    1. धन्यवाद, आपकी दी गयी जानकारी को हमने पोस्ट में सुधर कर के दाल दिया है।

  2. Aap jante hai ki ni pta ni lekin wha pe neta g ke aadmi ke rhte ek gumbaj chori. Ho gya dusra wha pe bhut sare fruits ka per hai jiska phl WO bech kr kya krte hai pta ni avi WO daru ka adda bna hua hai jitna v galat kam hota hai whi se start hota hai kheti se Jo paisa aata hai WO kha jata hai …ye SB v thoda malum kigiye aur us paisa se mandir ka uthhaan kigiye….

  3. बहुत खूब, इस मंदिर की सुन्दरता को जन जन तक पहुंचाने के लिए धन्यवाद।

  4. Rani Mandir Sursand ka punah jinodhar karna.. Aur waha ki sanskriti ko punah jagrit karna sarahniye kadam h..

  5. mai bhi apki trh hi is mandir ke bare me ek website bna kr host krta hu taki kuch jankari mere madhaym se bhi janhit me jari ho or mai bhi apke is kadm me bhagidari sajhan kr sku

  6. Apne hht accha kam kiya h bhai
    Rani mandir ke thik bagal me charaut mandir h jo bhagwan ram -sita ka mandir hua karta tha.
    Aap ooske bare me bhi post share kijiye.

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