आखिर देश किस ओर जा रहा है???

देश संविधान से चलता है फतवों से नहीं।और कुछ लोग हैं कि भारत के संविधान को मानते ही नहीं।उनका अपना कानून है।बात बात पर फ़तवा जारी कर देते हैं।भारत में रह कर भारत के टुकड़े कर देने की बात करे तो वो अभिव्यक्ति की आज़ादी है,लेकिन अगर किसी को लाउडस्पीकर से दिक्कत है और वो अपनी बात कहता है तो उसको इतनी भद्दी भद्दी गालियां दी जाती है।सिर मुंडवाने के फ़तवे जारी कर दिए जाते।अब तो उन्होंने खुद सिर भी मुंडवा लिया है।देखते हैं 10 लाख मिलता है कि नहीं।अगर थोड़ी भी शर्म बची हो उस मौलवी के अंदर तो उसे सोनू निगम से माफ़ी मांगनी चाहिए।दिल पर हाथ रख कर पूछिये अपने आप से किसको दिक्कत नही होती है लाउडस्पीकर से।सबको होती है साहब।चाहे वह लाउडस्पीकर अज़ान का हो,भजन का हो या शादी व्याह का हो।हम सब इस दंश को झेल रहे है।भगवान् या अल्लाह ऊँची आवाज़ से ख़ुश नही होते।सच्चे और साफ़ मन से ख़ुश होते है।चाहे वह व्यक्ति दिन में एक बार भी नमाज़ पढ़े या ना पढ़े।प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ फतवा जारी किया जाता है बंगाल के एक मस्ज़िद से की उनको सिर मुंडवा देंगे।वहाँ के सत्ताधारी पार्टी का एक सांसद भी उस मंच पर मौजूद रहता है।क्या है ये सब।आप मोदी के विरोध में इस हद तक आगे जा चुके है कि आप देश को भी बेच सकते।ऐसी राजनीति से आप गंदी लोकप्रियता तो हासिल कर सकते है लेक़िन यह देश के लिए बहुत ही ख़तरनाक स्थिति है।

कहाँ चले जाते है मानवाधिकार वाले कश्मीर में जब जवानों को पत्थर से मारा जाता है।उनके साथ बदसलूकी की जाती है।कुछ दिन पहले तो एक जवान की हत्या तक कर दी गई।क्या ये जवान मानव नहीं है।उनको कोई अधिकार नहीं है कि वो अपनी रक्षा करें।जब भी जवान इन देशद्रोही पत्थरबाजों को सबक सिखाती है तो कुछ लोगों उनसे अधिक पीड़ा होने लगती हैं।कहते है ये तो मानवाधिकार का हनन है।मासूम लोगों पर सेना बर्बता दिखा रही है।ऐसे लोग शायद ही दुनिया के किसी देश में होंगे जो अपने ही सैनिकों पर पत्थर फेंकते हो।अद्भुत है वाकई हमारा देश।
कुल मिलाकर मेरा कहना है की जो देश का राष्ट्रीय विमर्श है बहुत ही गलत दिशा में जा रहा है।आज हम बहस किस बात पर कर रहे है और आने वाली पीढ़ी जो सत्ता संभालेगी भविष्य में उसपर इन बातों का क्या असर होगा,हमें सोंचना चाहिए।
देश प्रगति की राह पर अग्रसर है।सभी लोगों की इसमें योगदान करना चाहिए ताकि हम अपने आने वाले पीढ़ी के लिए एक बेहतर भारत छोड़ कर जाएं।

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