मनचाहा प्यार, वशीकरण, सौतन से झगड़ा हो, हर जगह से नाकाम रोगी मिले, सीतामढ़ी स्टेशन पर बैठे वैद्य जी से- आनंद 😜😜

 

 sitamarhi

दिनांक 3-12-2016 दिन शनिवार, रात में ट्रेन थी, दरभंगा to Anand Vihar Special, बस नाम ही इसका है स्पेशल ट्रेन, और कोई स्पेशलत्व नहीं है, लेट चलने में तो लिच्छवि भी इसका सानी नहीं है. सीतामढ़ी स्टेशन के पास महावीर बजरंगी के मंदिर पहुंचे, गेट के दूनो साईड पर टीन पर बालुशाही बेचने का स्टेंड और उपर से छाता लगा के शिखर धवन टाईप आदमी बैठे हुआ है, जूता खोल के मंदिर में प्रवेश किए है, बजरंगी को प्रणाम करने के उपरांत मदन बाबा से दूई गो लड्डू प्राप्त हुआ है, सामने की पट्टी पर हनुमान चालीसा लिखा है, उपर से नीचे तक नजर दौड़ाते हुए एक बार रिवाईज कर लिए है, रिवाईज करने के उपरांत मंदिर से निकले है, गौ माता जीभ घुमाते हुए सामने प्रकट हो गई है, एगो खुद खाए है और एक लड्डू गौ माता को खिला दिए है,

और बोले — ‘हे गौ मईया आजकल आपका भाव बहुते बढ़ गया है, हमहूं आपको पूजते है, स्मार्टफोन चलाने वाला लगभग 90% व्यक्ति व्हाटसप, फेसबुक पर आपको बचाने और राष्ट्रीय जन्तु घोषित करवाने के लिए तैयार है, गौ माता चुपचाप लड़्डू खाके और गर्दन 270 डिग्री कोण में झुलाते हुए और हमें इगनोर करते हुए निकल ली है, शायद कह रही है कि चल बात मत बनाओ,  रोड पर प्लास्टिक खाते हुए धूप में बउआते है, पेट में दरद देता है, औरो उ परसो ऩएका जींस पैंट पहिने ललका मोटरसाईकिल वाला ऐनक से पीठी छिछोर दिया तो कोई पूछा नहीं है और चले हो तुमलोग गाय बचाने. फिर हम बोले है – कि हे मईया आप शायद न्यूज नहीं पढ़ती हो क्या? सुबह-शाम आजकल आपही तो छायी हुई है, हर शाम न्यूज आवर में आपका अरनब गोस्वामी से लेकर सरदाना तक एतना चर्चा करता है ऐतना चर्चा होता है क्या हिचकी आपको नहीं आती है ?,  सींग झुलाते हुए बोली है – जाओ भागो ईहां से हम चले है अपना रास्ते तू जाओ जहां जाना है. गौ माता से मेरे मौन वार्तालाप और गौमाता के इगनोरेंस के बाद हैंडबैग सरियाए है और स्टेशन परिसर में दाखिल हुए है. तीन चार कदम आगे बढ़ाए ही थे की आक्रामक आवाज कान में सुनाई दिया है, ऑटो वाला चिचियाया है, बैरगिनिया, बैरगिनया, चलिएगा बैरगिनिया, दूबर पातर एगो चचा के हाथ पकड़ के झुला के पूछ रहा है, बैरगिनिया चलिएगा, चचा पिनपिना के बोले है – ई का तरीका है भाई, हम काहे जाए हो, तुम जाओ, जहां जाना है, ससुरा कहीं के अंतरी तक झुला दिए हो, ई सब ऐपिसोड के बाद स्टेशन पर पहुंचे है.

पता चला  कि ट्रेन लेट है, लग गया हूं मैं स्टेशन के सूक्ष्म निरीक्षण में, दाएं साईड काउंटर पर किताब बिक रहा है, इनके पास हर जॉनर की किताब है, सी ग्रेड उपन्यास से लेकर करेंटअफेयर्स की किताब तक,

लेकिन एक बात नोट कल्लो, लिख लो  “स्टेशन पर सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक ‘सरस सलिल’ ही है”,  हमभी प्रभात खबर पेपर लिए और खोल कर खड़े हो गए है, पास खड़े अधेड़ उम्र के चचा चश्मा नाक पर सरका के सरस सलिल देखने के लिए उठाए है, छम्मक छल्लो वाले कार्टून को देखने से शुरूआत किए है, अधनंगी फोटूआ तक पहुंचे है, फिर कि न कि मिजाज में आया है खरीद ही लिए है,

बगल में चायवाला का दूध उधिया रहा है, और उ खैनी रगड़ रहा है, उसके द्वारा नीचे फेंकी गई इस्तेमाल हो चुकी चायपत्ती पर मक्खी चायपत्ती से ऐसे लिपटी पड़ी है जैसे इमरान हाशमी, टिकट के लिए आया हू काउंटर पर, टिकट लेकर निकले है, टिकट काउंटर से बाहर निकलने पर बाएं साईड खुले में 8-10 आदमियों को पेशाब करते और प्रधानमंत्री स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ाते हुए देख रहा हूं. ये लोग बता देना चाहते हैं कि मोदी जी, तू कितनों “मन की बात” कर लो, लोगों पर स्वच्छ भारत सेस(उपकर) लगा लो, सब को जागरूक कर लो लेकिन हम तो खुले में मूतेंगे ही.

यहां से पश्चिम की ओर नजर गई है. चारो तरफ से लोगों की भीड़ लगी हुई, पहुंचा हूं,  भीड़ के बीच में एक छोटा सा तंबू है, ये वैद्य जी है, इनकर पैनकार्ड साईज के पंपलेट पास खड़े सब लोगन के हाथ में है, और पास में पड़ी हुई रेडियो के साईज के स्पीकर अपनी नियमित अंधाधुंध आवाज निकल रहा है – अगर आप ‘स्वप्नदोष’ की समस्या से पीड़ित हैं, सौतन का झगड़ा हो चाहे, किसी को अपने वश में करना हो, लईका बिस्तर पर पेशाब कर देता है, तो चले आइए हमारे क्लीनिक में। दांत के दरद, पेट के दरद, माथा के दरद, जीभ मिचलाता है, पेट गुरगुराता है, आईए वैद्य जी से मिलिए, बबासीर, भगंदर, गठिया के शर्तिया इलाज वैद्य जी के पास,  एक हफ्ते में गारंटी के साथ इलाज, ठीक न हुआ तो दूगूना पैसा वापस हो जाएगा।

समझ में न आ रहा था कि हंसे की रोए, भारत सरकार को अतिशीघ्र इन वैद्यों को निमंत्रण देकर बुलाना चाहिए, सारा इलाज है इनके पास भाई,  48,500 करोड़ रुपिया भारत सरकार 2017-18 फाईनेंशियल ईयर में हेल्थ सेक्टर के लिए एलोकेट किया है, साला फालतू का ऐतना बड़का बजट भारत सरकार का स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च कर रही है,

तनी देर बाद फिर वो रेडियो बोल पड़ा है, वैद्य जी हिमालय की कंदराओं में जाकर तपस्या कर के जड़ी बूटी पर रिसर्च किए है, आईए हर जगह से नाकाम निराश रोगी जरूर मिले,

मेरी नजर गई है इनकी छोटी सी तंबू और और उसमें भगवान की लगी तस्वीरों पर हनुमान जी, काली माई, भोले नाथ सब की तस्वीरें रखी है, मतलब भगवान के फोटो दिखाकर यहां भी बेवकूफ बनाया जा रहा है, धर्म का इस्तेमाल नेतवन से लेकर ई चिरकुट बाबा तक सब अंधांधुंध कर रहे है, धर्म समाज को जोड़ने के लिए है, समाज भिन्न भिन्न भागों में विभक्त हो रही है, लेकिन बाबाओं और नेताओं के बिजनस और वोट के लिए संजीवनी बूटी है,

तंबू में और नजर दउराए है, काली पीली डिब्बों में कथित हिमालय पर्वत से प्राप्त जड़ी बूटियां सुशोभित होती दिख रही थी। कुछ अधेड़ उम्र टाईप बुजुर्ग ‘शिलाजीत’ की पुड़िया जेब में रखकर धीमी आवाज में सेवन की विधि समझ रहे थे। तभी एक बुढ़िया माई तपाक से पूछी है — बाबा ई हमर पोता है, हर रोज रात में बिछावन पर पेशाब कर देता है, कोई उपाय बताईए, काली दाढ़ियों पर हाथ फेरते हुए बाबा, हरियरका डिब्बा में से एक जड़ी बूटी निकाले है, और उ मां जी के कान में मंत्र पढ़ दिए है, बोले है कि हर रात सोने से पहिले खिला दीजिएगा, 50 रूपया इनका फीस हुआ है, फिर बांए ओर से एक युवा भी तपाक से बोला है कि बाबा देखिए न हम उ  लाजवंतिया के केतना दिन से चाहते है, सावन में नंगे पांव जाके दू सोमवारी भोला बाबा के जल भी चढ़ाए थे, लेकिन हम जब बोले की तोहरा से पियार करते है तो बोली कि आईना में शकल देखे हो, बानर लउकते हो, अब हमरा त कुछो समझ में नहीं आता है, कि करें, मार्गदर्शन कीजिए,  बाबा फिर नीले आसमान की ओर देखते हुए अचानक से ओहि हरियरका डिब्बा में से ही जड़ी बूटी निकाल कर दे दिए है, युवा भड़का है कि उ पेशाब वाला लईकबा के भी ओहि हरियरका डिब्बा में से ही दिए थे और हमरो ओहि में से दे रहे है, आयं पागल समझे हो हमके,

 बाबा बोले अरे मंत्र का फरक है बाबू, गणेश जी को लड्डू चढ़ाते हो, हनुमानजी को भी लड्डू ही चढ़ाते हो, लेकिन चालीसा दूनो अलग अलग पढ़ते हो की न, मंतर दूनो का अलग पढ़ते हो कि न,  एतना धाकड़ दर्शन सुन के ई तो झट से कनविंस हो गया है, बाबा कान में मंत्र भी समझा दिए है, बोले है कि अरबा चाउर में मिला के या के घर के चारो ओर छीट देना, 50 रूपया फिर इसका फीस हो गया है, पास खड़े सभी लोग अपनी अपनी समस्याओं को लेकर बाबा के सामने प्रकट हुए, कुछ को तो पता है कि बाबा बेवकूफ बना रहा है, लेकिन समस्या देश में इतना है कि बाबा का बिजनस चल रहा है, समाज की कमजोर नब्ज की पकड़ इन बाबाओं के पास है, आप भले IIM अहमदाबाद से पढ़ के आए हो लेकिन इतना जल्दी लोगो को कनविंस करने की कला को आपको भी इनसे सीखना पड़ेगा, सब अपनी रुआंसी शक्ल लेकर आ रहा है, हंसते हुए जा रहा है कि आशा है कि वैद्य जी की जड़ी बूटी काम कर जाएगा,  केतना लाजवंतिया,  खुशवंतिया, संगितिया, सुनितिया से वनसाईडेड प्रेम का इलाज बाबा यहीं सीतामढ़ी स्टेशन पर बैठे कर रहे है. फिर अचानक से उद्घोषणा हुई है, घिघियाती  हुई आवाज में,  ट्रेन प्लेटफार्म न. 2 पर लगेगी, बैग सरियाए है सुपरसोनिक गति से भाग के पहुंचे है,  प्लेटफार्म नं. 2 पर.

 हर जगह से आप भी नाकाम है, निराश है तो आईए आप के लिए भी बाबा जी जड़ी बूटी रखे है 😜

बाकी जय महिष्मती.

— आनंद

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