एक शादीशुदा जोड़े का bachelorhood #birthdayspecial

 

 

इनसे मिलिए! ये हैं भावी नेताजी और उनकी नेताइनजी।दोनों एक वर्ष से विवाहित हैं। पर साथ नही रहते। कारण? नही नही कोई मतभेद नही है रामजी की दया से। बस मैडम जी पढाई लिखाई कर रही हैं और नेताजी काम धंधे में लगे हैं। दूरी करीब 1500 किलोमीटर की है दोनों को बीच, पर फर्क नही पड़ता। दोनों संतुष्ट हैं अपने अपने बचेलरहुड से।

रही बात मिलने की तो साहब महीने दो महीने पर चक्कर लगा आते हैं मैडम के ठिकाने पर। मैडम नही आती क्योंकि उन्हें कॉलेज से छुट्टी लेनी होती है। और साहब तो ठहरे मनमौजी, जब मर्ज़ी झोला उठाया और बैठ गए ट्रैन में।कहते हैं इसी दिन के लिए तो हमने नौकरी छोड़ी थी मोहतरमा वरना आपसे मिलना मुश्किल हो जाता।

मैडम जी हैं सफाई सलीके वाली, और नेताजी हैं वनचर, मस्तमौला, सफाई ,नियम,दिनचर्या से कोसो दूर। तो जब मैडम जी के ठिकाने पर जाते हैं तो वहां भूचाल आ जाता है। जाने के हफ़्तों बाद तक मैडम शुक्र मनाती हैं कि बला टली। घिस घिस कर सफाई करती हैं और अकेलेपन का आनंद लेती हैं।
साहब जहां रहते हैं उसी को घर बना लेते हैं। न कपडे लत्ते की दरकार न जेब में पैसों की चिंता। सुना है अब तो बैग में एक टेंट भी रख कर घूमते हैं, जहां मर्ज़ी बिस्तर लग जाता है उनका। गरीबी और बंजारेपन का शौक जो ठहरा।

अब दिक्कत क्या है इस bachelorhood में? सच पूछिए तो कुछ भी नही। अरे भई पूरी ज़िन्दगी पड़ी है साथ रहने को, जल्दी क्या है? मुफ्त में लोगों की सहानुभूति की अनुभूति होती रहती है। अब बताइये कौन सा ऐसा मर्द होगा जो ये न चाहे के उसके घर पर यार दोस्तों का जमावड़ा लगा हो,बेतरतीब दाढ़ी बढ़ी हो, तौलिये से हर बार अपने पसीने की सुगंध आये, रोज़ रोज़ बाहर खाने का अवसर मिलेऔर शादी के बाद ये सुख नसीब हो तो उससे बड़ा सौभाग्य और क्या होगा भला? और रही बात मैडम जी की तो उन्हें भी तो आजादी है। जो मर्ज़ी खायें, जो मर्ज़ी बनायें। न चूल्हे चौके का झंझट न घर जल्दी जाने की चिंता।

तो भैया अंत में बस इतना कहूँगी की अगर किसी कारणवश आप भी विवाहित bachelorhood के शिकार हैं तो दुखी मत होइए। मुस्कुराइये और आनंद लीजिये। किसी ने यूंही थोड़े न कहा है कि दूरियों से प्यार बढ़ता है।

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