ग्रामोफोन के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों को जीवंत बनाये रखे हैं डुमरा के प्रो. आनंद बिहारी लाल वर्मा ।

तकनीक बदली, लेकिन आज भी ग्रामोफोन कर लोग हैं दीवाने ।

साहित्य साधना,संगीत के प्रेमी,पूर्वजो के धरोहर के दीवाने एवं सीतामढ़ी के कवियों में सुमार प्रो.आनंद बिहारी लाल वर्मा और ममता वर्मा पर खास रिपोर्ट :-

आज के बदलते परिवेश एवं इंटरनेट की दुनिया में ग्रामोफ़ोन,टेप रिकॉर्डर,सीडी कैसेट सहित संगीत के सभी वैसे स्रोत जिनके माध्यम से हमारे पूर्वज और हम सभी संगीत का लुफ्त उठाकर मंत्रमुग्ध होते थे,वे अब विलुप्त की कगार पर है। इसी क्रम में डुमरा कुमार चौक स्थित(गीता भवन) निवासी एवं तिरहुत प्रक्षेत्र के प्रथम विधान पार्षद स्व.सावलिया बिहारी लाल वर्मा के पौत्र डॉ. आनंद प्रकाश वर्मा ने हमें बताया कि तकनीक बदलते जा रहे है लेकिन आज भी वे अपने पूर्वजों के इस धरोहर(ग्रामोफ़ोन)को संजोए रखे है।

प्रो. आनंद बिहारी लाल वर्मा की पत्नी ममता वर्मा ‘सीतामढ़ी वेब परिवार’ से जुड़ी हुई हैं। ममता जी #सीतामढ़ी_फेसबुक_पेज की सक्रिय सदस्य हैं । हमेशा हमें और सीतामढ़ी पेज के कामों की सराहना करती है । प्रोत्साहित करती हैं, मार्दर्शित करती हैं ।नीचे एक तस्वीर में सीतामढ़ी वेब परिवार द्वारा प्रकाशित बुकलेट ‘आई लव सीतामढ़ी’ पढ़ती हुई ममता वर्मा जी । ममता जी ने बताया कि फुर्सत के क्षणों में जब इसे बजाती हूँ और जब इसकी आवाज बुलंदी के साथ गूंजती है तो लोग दौर कर इसकी संगीत की धुन को सुनने आ जाते है। वे बताते है कि ग्रामोफ़ोन के एक हज़ार से अधिक कैसेट जो उनके पास बचे थे अब वे बचाते बचाते करीब पांच सौ की संख्या में हो गए।

ग्रामोफोन की धुन सुनिए सीतामढ़ी यूट्यूब पर :

डॉ. आनंद बताते है कि अब तो इसके कल पुर्जे भी बाजार में उपलब्ध नही है,लेकिन खराब होती है तो सिर्फ इसकी सुई जो कि आवश्यकता पड़ने पर कलकत्ता से मँगवाना पड़ता है।बिना बिजली और बैटरी के चलने वाली एचएमवी कंपनी और इंग्लैंड मेड दो ग्रामोफ़ोन उन्होंने अपने दादाजी के यादों को संजोए रखा है।

इसी क्रम में उन्होंने बताया कि उनके पास आज भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देशरत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद द्वारा लिखी गयी चिट्टी(उनके दादाजी को) और उनसे जुड़ी बहुत सी यादों को उन्होंने संजोए रखा है। सायाकोसा जापान की 106 वर्ष पुरानी दीवार घड़ी,हॉलैंड का रेडियो,टाइपराइटर आज भी उनके घरों में पुर्वजो के याद को ताजा करता है। अंत मे बताते चले की डॉ. आनंद डुमरा रामसेवक सिंह महिला कॉलेज में बीसीए फैकल्टी में हिन्दी के व्यख्याता है । सीतामढ़ी वेब परिवार की तरफ से आप दोनों को हार्दिक शुभकामनाएं ।

न्यूज़ साभार : ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव

आर्टिकल : ( रंजीत पूर्बे )

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1 thought on “ग्रामोफोन के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों को जीवंत बनाये रखे हैं डुमरा के प्रो. आनंद बिहारी लाल वर्मा ।

  1. बहुत बढ़िया। आपके द्वारा इन यादों को संजोए रखना वाकई काबिले तारीफ।।

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