चिरंजीवी हनुमान आज भी जीवित हैं !

indexअंजनी पुत्र हनुमान आज भी जीवित हैं. इसके कई प्रमाण हैं जिन पर आज हम नजर डालेंगे. हनुमान के शारीर त्यागने का कोई सबूत नही है और माना जाता है की जब तक धरती पर भगवान राम का नाम है तब तक हुनमान इस धरती पर जीवित रहेंगे. बहुत पुरानी बात नही है १९८८ में एक भक्त ने भगवान् हनुमान की तस्वीर ली थी जो लोगो के बीच पहुंची थी. ऐसा कहा जाता है की उस तस्वीर को लेने वाला व्यक्ति जीवित नहीं रह सका.
यूँ तो रामायण का प्रसंग त्रेता युग में हुआ था परन्तु हनुमान के होने के प्रमाण हर युग में मिलते हैं. ऐसा माना जाता है की संत माधवाचार्य को तेरहवी शताब्दी में भगवान् हनुमान से आशीर्वाद प्राप्त हुआ था. तुलसीदास जी को हनुमान के दर्शन कलियुग में ही हुए थे. तुलसीदास जी ने यूँही नहीं लिखा था “चारो जग प्रताप तुम्हारा, है प्रसिदध जगत उजियारा”. किन्वंदती यह है की हनुमान रामेश्वरम के निकट एक पर्वत पर आज भी वास करते हैं.
शिमला के जाखू मंदिर को हनुमान की उपस्थिति के लिए जाना जाता है. माना जाता है की भगवान् हनुमान ने यहाँ कुछ समय के लिए विश्राम किया था. गुजरात के दांड जिले को रामायण के समय में दंडकारण्य कहा जाता था. यहाँ के वासी मानते हैं की वनवास के लिए पंचवटी जाते समय श्री राम ने दांड को पार किया था और यहीं माता शबरी ने श्रीराम और लक्ष्मण को बेर खिलाये थे. इसी कारण इस जगह को शबरी धाम के नाम से जाना जाता है. यहाँ से तकरीबन सात किलोमीटर की दूरी पर पूर्णा नदी के तट पम्पा सरोवर है. इस सरोवर के पास मतंग ऋषि का आश्रम है. यहाँ के लोगों का मानना है की दांग में स्थित अंजनि पर्वत में एक अंजनि गुफा है जहाँ हनुमान की माता रहती थी एवं हनुमान का जन्म हुआ था.
भगवान् हनुमान के होने का एक प्रमाण हमारे शहर सीतामढ़ी में भी है. कुछ साल पहले की बात है . शहर के आई टी आई चौक के निकट एक पुल है जहाँ अक्सर भयानक सड़क हादसे हुआ करते थे. उस पुल से कुछ ही दूरी पर एक विशालकाय वृक्ष था जिसके बारे में माना जाता था की उस वृक्ष पर बुरी शक्तियों का वास है जो इन हादसों का कारण थी. सर्वसम्मति से फिर यह प्रस्ताव रखा गया की इस स्थान की शुद्धि की जाए. अब इसके लिए श्री राम के नाम से बड़ा हथियार क्या हो सकता था. उस स्थल से थोड़ी दूरी पर एक राम नाम के महायज्ञ का आयोजन किया गया. श्रीराम नाम की महिमा देखिये की उस यज्ञ के समापन के कुछ समय बाद ही वह विशालकाय वृक्ष धराशायी हो गया. और इसके साथ ही उस पुल पर होने वाले हादसों का भी अंत हो गया. सच ही तो है जहाँ भी राम नाम की गूँज होगी, भगवान् हनुमान स्वयम पधारेंगे .
श्रीराम ने स्वयम ये भगवान् हनुमान को अमरत्व का वरदान दिया है और कहा है की जहाँ भी श्री राम का नाम लिए जायेगा ,हनुमान वहां वास करेंगे.

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