छलक त हमरो जवनिया ऐ राजा 😜 – आनंद

पटनिया गंगास्नान के बाद पटना टू नईदिल्ली विक्रमशिला express मे चढा हूं , पिछले तीन चार दिनों से जिंदगी वास्कोडिगामा जैसी हो गई है ऐसे ही तीन चार दिन और घूमता-भटकता रहा तो पक्का किसी इंडिया नामक द्वीप की खोज तो कर ही लूंगा,  Madhav भाई का बहुत-बहुत धन्यवाद, कि द्रुत गति से लहरिया कट मारते हुए 10 मिनट में ट्रेन आने के आधा घंटा पहिले पटना जंक्शन पर लैंड करवा दिए है, बड़े सरल व्यक्तित्व, मिलनसार, हर बार मिलकर इनसे कुछ न कुछ सीखता हूं.

स्टेशन पर पहुंचते ही लग गया हुं, स्टेशन परिसर के सूक्ष्म निरीक्षण मे, शायद कोई पैसेंजर ट्रेन आयी है, करबिगहिया साईड मे टीसी बाबूओं के झुंड ने 15 बीस ठो बेटिकटियों  को रस्सी बोले तो पातर पगहा मे  छान कर घेर रखा है,

हल्ला गुल्ला, चिचियाहट ….दाई के दाई, दीदी गे दीदी तोहरा कहले रहलिउ न टिकटिया कटाबे ला, ले अब देही पैसा टीसिया के, एक कह रहा ओ सर हम त बख्तियारपुर चहरबे किए है, बहुते भीड़ था उहां टिकट काउंटर पर जल्दबाजी मे टिकटिया न ले पाए, एक बुजुर्ग बाबा तो खुदरिया 70-80 गो पुराके दे रहे, एक कह रहा कि 37₹ है हमरा जेभी मे,  सर ले लीजिए और हमरा छोड़ दीजिए 5बजे से हमरा ट्यूशन है, है, टीसी तो उसे अईसे इगनोर कर रहा जईसे मोदीजी आडवाणी को कर देते है.

यहाँ से आगे आया हूं  शौचालय की ओर, बोले तो सुलभ नहीं दुर्लभ शौचालय है, पूरे दिनभर मे लगभग 5000 आदमी मूतने जाते होंगे, वो भी बिना पानी डाले, आंख कान और नाक पर काल्पनिक पर्दा डाल के उल्टे पैर पलायन वेग से भागा हूं.

Mobile पर ट्रेन रनिंग स्टैटस देखते हुए आगे बढ़ रहा हूं तभी मरियल केकियाती हुई आवाज में उद्घोषणा हुई है विक्रमशिला एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर तीन पर आ रही है, भागकर पहुंचा हूं.

1कुरकुरे और दो ठो बिसलरी बोतल कांखी मे दाब के    S 4 में चढा हूं, देख रहा हूं कि मेरे सीटपर तो कल्ला मे पान पराग दाबे, उजरा कुरता-पैजामा पहिने और हाथ मे आउटलुक मैगजीन पढ रहे व्यक्ति already विराजमान है, साथ मे तीन ठो औरो है, अंकल जी को अपने टिकट का PDF वर्जन दिखाया हूं, चचा मान गए है, और कह भी रहे की देखिए 12-14 घंटा के त बाते है, कईसहुओ adjust कर के निकल जाएंगे, ट्रेन खुल चुकी..

हमरे सीट पर वाले चचा…. सामने वाले सीट पर अब अतिक्रमण करते हुए बैठ गए है, साईड अपर और लोअर पर 2-2 आदमी बैठे हुआ है, टरेन मे घुसते ही तो पहले चार्जिंग प्वाइंट ढूंढ रहा, चार्जिंग प्वाइंट मिलते ही इसके चेहरें पर इतनी खुशी दिख रही..  इतना तो नील आर्मस्ट्रांग भी चंद्रमा पर लैंड कर खुश न हुआ होगा 😂

बगल वाले कंपार्टमेण्ट  मे भोजपूरी के आदिगायक पवन सिंह का गाना बज रहा.

छलक त हमरो जवनिया ऐ राजा जईसे की बल्टी के पनिया हो……..😜

दो तीन लड़के सुर ताल मिला रहे,

एक बात नोट कल्लो, कोपी कलम पास मे है तो लिख लो, कितनो बुलेट ट्रेन मोदी चचा चलवा दे, metro दउरा दे लेकिन जईसन देशी फीलिंग्स indian railway मे आती है, शब्दों मे वर्णन तो असंभव है.😜

इसी बीच कुरता पैजामा वाले चचा ने राजनीति़क चर्चा छेड़ डाला है, क्या लग रहा है तेजनरायण बाबू योगी आदित्यनाथ UP सुधार देंगे, देख रहे है केतना लईका

 बर-बेमारी से मर रहा, ई कितबबा मे लिखा है 400 से ज्यादा बच्चा मर गया अगस्त महीनमा में,

सामने वाले तेजनारायण बाबू ने आउटलुक मैगजीन को मोड़ते हुए कह डाला है देखिए शंभु बाबू मोदी जी और योगी मे ढेरों फर्क है उनके पास भिजन(विजन) है, डेवलेपमेंट का अनुभव है, लेकिन योगी ठहरा बाबाजी और उसको विकास के नाम पर वोट थोड़े न मिला है, उसको तो वोट दिया है मंदिर बनवाने के लिए, उ तो मठ मंदिर का आदमी है, रोड, अस्पताल, स्कूल से क्या मतलब?

राजनीतिक चर्चा जोड़ो पर है, पास बैठे सभी लोग चर्चा मे भाग ले चुके है, तर्क कुतर्क चल रहा, बगल वाले कंपार्टमेण्ट  मे तो पवन सिंह जी पिछले एक घंटा से रिवाइज कर करके गाए जा रहे….छलक त हमरो जवनिया ऐ राजा जईसे की बाल्टी के पनिया हो….

तभी डिनर के लिए रेलकर्मियों का समूह आया है, भूख के मार से पेट मे चूहा  तो छोड़िए बिलार, सियार, गीदड़ सब दउर रहा है, सोच रहे है कि ट्रेन का खाना ले ही लेते है, लेकिन पिछले दिनों के कैग का रिपोर्ट पढे थे, रेलवे खाना के बारे मे, रेलवे का पोल खोल दिया था. लेकिन का करे भूख लगा है, वेज भोजन लिया हूं, 92₹ बोल रहा, 100 का नोट ले गया है बोल रहा आकर लौटाते है,

 भोजन मे दो रोटी,  दाल चावल एक चटनी और कथित मटर पनीर है, कथित इसलिए की मटर पनीर में पनीर तो दिख नहीं रहा, जींस पैंट, शर्ट और गंजी खोल के  मटर पनीर मे कूदकर और तैरकर पनीर खोजने की सोच रहा हूं, 100 ₹ लेकर गया था आठ वापस भी नहीं किया. आंखें बूढी हो गई उस 8₹ वाले को ढूंढते-ढूंढते😊

ट्रेन पूर्ण रफ्तार मे है. सभी लोग नींद्रासन के मूड मे है, मै भी  कुमार सानू दा के 90s के songs headfone मे लगा सोने जा रहा हूं,

 लेकिन, हां बगल वाले कंपार्टमेण्ट  मे अभी भी पवन सिंह जी रेघाए जा रहे

– “छलक त हमरो जवनिया ऐ राजा जईसे की बल्टी के पनिया हो…😜”

– आनंद कुमार,

  सीतामढी

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