जब डीएम अचानक पहुंचे सब्जी मंडी (पॉलीथिन मुक्त सीतामढ़ी)

पॉलीथिन और प्लास्टिक के खिलाफ आज सुबह सुबह चला अभियान । जिला प्रशासन आपसे सहयोग की अपील करती है ।
डीएम सीतामढ़ी डॉ रणजीत कुमार सिंह के नेतृत्व में सुबह सुबह डुमरा के बड़ी बाज़ार पर चला पॉलीथिन मुक्त अभियान । ढेर सारे पॉलीथिन प्लास्टिक जब्त किए गए । कल भी सीतामढ़ी शहर के लोहापट्टी, सोनापट्टी,गुदरी बाज़ार आदि जगहों से 6 बोरा पॉलीथिन और 24 हज़ार की राशि दंड स्वरूप वसूले गए ।
डीएम ने बताया : सीतामढ़ी पॉलीथिन मुक्त हो चुका यह औचक निरीक्षण आगे भी जारी रहेगा । पॉलीथिन का उपयोग करते पकड़े जाने पर कानूनी कारवाई होगी । पॉलीथिन ‘धीमा जहर’ है । इसका प्रयोग न करे

। सुनिए जिला पदाधिकारी ने आज क्या कहा :

#Plastic_Ban #Say_No_to_Polythene
#Sitamarhi

डीएम डॉ. रणजीत कुमार सिंह के निर्देश के आलोक में पूरे जिले में प्लास्टिक बैन को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। गौरतलब हो कि जिले में 15 अगस्त से ही प्लास्टिक के उपयोग,निर्माण एवम बिक्री पर रोक है।

प्रखंडो में भी पॉलीथिन जब्ती अभियान जोर पर है । लोगों को समझाया बुझाया जा रहा । पॉलीथिन और प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करे ।

सुनिए प्लास्टिक और पॉलीथिन को सीतामढ़ी में प्रतिबंधित किये जाने के दिन जिला पदाधिकारी ने क्या कहा :

डीएम ने सभी बीडीओ,सीओ एवम कार्यपालक पदाधिकारी को जोरदार अभियान चलाने का निर्देश दिया।डीएम ने कहा है कि न सिर्फ पर्यावरण बल्कि स्वास्थ्य के दृटिकोण से भी प्लास्टिक काफी नुकसानदेह है।उन्होंने कहा है की खुले में शौच मुक्त जिला बनने के बाद अब सबसे पहले सीतामढ़ी जिला ही प्लास्टिक मुक्त जिला बनेगा,जो व्यापक जनसहयोग से ही संभव है।

ज्ञात हो कि बिहार में सर्वप्रथम सीतामढ़ी जिला में ही 15 अगस्त से डीएम के आदेश द्वारा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सभी प्रकार के प्लास्टिक पर बैन लगाया गया। बैन के एक महीना पूर्व से समाचार एवम अन्य माध्यमों द्वारा इसकी सूचना भी दी गई थी।जिला प्रशासन जिविका की दीदीयों द्वारा झोला बनवाकर कई स्थानों में स्टॉल लगाकर बिक्री भी की गई।मुफ्त में कई स्थानों पर झोला का वितरण किया गया। प्रशासन द्वारा प्लास्टिक व्यवसायियो को झोला एवम अन्य व्यापार करने हेतु बैंक के माध्यम से लोन दिलाने हेतू करवाई की गई। पॉलीथिन के विकल्प के रूप में झोला एवम ठोंगा आदि के उपयोग से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढेंगे। अगर थोड़ा-थोड़ा सबके त्याग करने से पर्यावरण सहित सभी के स्वास्थ्य पर इसका अनुकूल प्रभाव पड़ता है तो हमे इस अभियान में अपनी सक्रिय सहभागिता अवश्य निभानी चाहिये ।

शौचालय बन गए है,फिर भी लोग उसका उपयोग नही करके लोटा लेकर चल देते है,उसी तरह झोला एवम अन्य विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद भी जब तक हम अपने सोच एवम आदत को नही बदलेंगे तब तक इस तरह के अभियान को बल नही मिल सकता है।

आर्टिकल : ( रंजीत पूर्बे )

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