सीतामढ़ी डीएम के इस एक पत्र से शिक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलाव होंगे ।

आखिर क्या लिखा है ??? 28 जनवरी 2019 को सीतामढ़ी समाहरणालय ,शिक्षा विभाग से निर्गत उस पत्र में जिलाधिकारी डॉ रणजीत कुमार सिंह द्वारा । इस पत्र के माध्यम से जिले के सभी प्राथमिक,मध्य,उच्च और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को निर्देश दिया गया है । आईये एक विस्तृत नजर डालते हैं :

शिक्षा : भारतीय संविधान के अनुसार 14 वर्ष तक सभी बच्चों को शिक्षा प्राप्त करना उसका मूल अधिकार और कर्तव्य दोनों है । उसी तरह नीति निदेशक तत्व में राज्यों को स्पष्ट निर्देश है कि 14 वर्षों तक राज्य सभी बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करे ।

शिक्षा : व्यक्ति और समाज के उन्नति के सबसे बड़ा माध्यम है । वास्तव में शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है जिससे गरीबी दूर किया जा सकता और व्यक्ति तथा सम्पूर्ण समाज प्रगति के पथ पर अग्रसर हो सकता ।

सीतामढ़ी जिलाधिकारी डॉ रणजीत कुमार सिंह भी शिक्षा को विकास का सबसे बड़ा आयाम मानते हैं । सीतामढ़ी डीएम के रूप में पदभार ग्रहण करते ही सबसे पहले जिस चीज ओर उन्होंने ध्यान दिया और काम करना शुरू किया, वह शिक्षा ही था । पदभार ग्रहण करने के कुछ ही दिन बाद उन्होंने सीतामढ़ी में ‘प्रवेशोत्सव’ का एक बड़ा कार्यक्रम शुरुआत किया । यानी शिक्षा के विकास के लिए उन्होंने इसे एक जन आंदोलन का रूप दिया । जिले के सभी विद्यालय में एक ही दिन में रिकॉर्ड बच्चों का नामांकन हुआ ।

अपने कामों से देश भर में चर्चित सीतामढ़ी के जिलाधिकारी डॉ रणजीत कुमार ने आखिर उस पत्र में क्या लिखा है ??? जिसकी चर्चा चारो तरफ है । चर्चा लाजिमी है । क्योंकि इस पत्र के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है । शिक्षा के समर्थक बहुसंख्य लोग डीएम के इस पत्र की तारीफ कर रहे । वहीं कुछ ऐसे लोग भी है जिन्हें इस पत्र से दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है । यही वजह है कि कुछ लोग वेवजह इस मामले को तूल भी दे सकते हैं। हो सकता है राज्य सरकार इस पत्र को आधार मान कर पूरे बिहार में शिक्षा व्यवस्था के सुधार हेतु इसे लागू भी करवा दें।

आईये एक विस्तृत नजर डालते है इस पत्र पर । फिर इस पत्र की हर एक बिंदु का सिलसिलेवार ढंग से विशेषण करते हैं। आप खुद समझ जाएंगे शिक्षा के विकास और उसमे बदलाव के लिए सचमुच सीतामढ़ी डीएम ने एक बड़ा कदम उठाया है जो कि काबिलेतारीफ है ।

ये रहा पत्र :

28 जनवरी 2019 को सीतामढ़ी समाहरणालय ,शिक्षा विभाग से निर्गत इस पत्र में जिलाधिकारी डॉ रणजीत कुमार सिंह द्वारा लिखे गए इस पत्र में जिले के सभी प्राथमिक,मध्य,उच्च और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को निर्देश दिया गया है । पत्र का विषय है ”विद्यालय में नामांकन के अनुरूप छात्र छात्राओं और शिक्षकों की अनुपस्थिति के संबंध में दिशा निर्देश ” ।

पत्र में कहा गया है कि क्षेत्र भ्रमण और विद्यालय निरीक्षण के दौरान जो बात संज्ञान में आई है वो बेहद चिंताजनक है । विद्यालय की व्यवस्था एवम शिक्षा में गुनवतापूर्ण बदलाव के लिए समय समय पर दिशा निर्देश दिया गया है जिसका अनुपालन तत्काल सुनिश्चित करना आवश्यक है ।

1) आदतन अनुपस्थित रहनेवाले विद्यार्थियों पर निम्न आर्थिक दण्ड आरोपित किये जाते हैं

कक्षा 1 से 5 : 1 रुपया प्रतिदिन, कक्षा 6 से 8 : 3 रुपया प्रतिदिन, कक्षा 9 से 12 : 5 रुपया प्रतिदिन । दण्ड की ये राशि विद्यालय के छात्र कोष,विकास कोषया विद्यालय विकास समिति के खाते में जमा किया जाए ।

2) अगर किन्हीं छात्र छात्राओं को विद्यालय नहीं आना है तो एक दिन पूर्व वो प्रधानाध्यापक को लिखित आवेदन देकर अनुमति लेंगे । बच्चें द्वारा आवेदन लिखने में सक्षम नहीं होने पर अभिवावक द्वारा आवेदन लिखा जाएगा जिसपर छात्र हस्ताक्षर या अंगूठा निशान लगाएंगे । विशेष परिस्थिति जैसे चिकित्सा या सामाजिक दायित्व निर्वाहन आदि के कारण छुट्टी वाले आवेदन को प्रधानाध्यापक द्वारा स्वीकृत किये जायेंगे ।

3) सरकारी अधिसूचना के अनुसार लगातार 28 दिन तक अनुपस्थित रहनेवाले छात्र छात्राओं का नाम नामंकन पंजी से हटा दिया जाएगा । अगर शिक्षक भी बिना अवकाश स्वीकृत कराए विद्यालय से अनुपस्थित होते हैं तो उनकी वेतन कटौती कर वेतन भुगतान किया जाएगा । शिक्षक अगर बिना अवकाश स्वीकृत कराए 7 दिन तक अनुपस्थित पाए जाएंगे तो उन्हें सेवा बर्खाश्त करने की कारवाई की जाएगी ।

तीनों बिंदु ध्यान से पढिये । सभी का विश्लेषण जरूरी है । आईये एक नजर डालते हैं :

पहली बात, ये आर्थिक दण्ड अनिवार्य नहीं है । यह आदेश आर्थिक दण्ड वसूलने के लिए नहीं बनाया गया है । इसका एकमात्र मकसद है विद्यालय में छात्र छात्राओं का नियमित रूप से अध्ययन कार्य मे भाग लेना । छात्रों की संख्या नियमित हो । छात्र छात्राओं के बीच अनुशासन बना रहे । शिक्षक और छात्र के बीच का सम्बन्ध बना रहे । ये आर्थिक दण्ड सिर्फ एक ‘चेतावनी’ स्वरूप है ताकि छात्र छात्राएं नियमित रूप से विद्यालय आये और पढाई लिखाई का कार्य करे ।

इसमे दूसरा महत्वपूर्ण बात यह है कि अक्सर देखा जाता है विद्यालय में नामांकन पंजी के अनुसार बहुत से फर्जी विद्यार्थियों का नाम अंकित है । जो सही में विद्यालय में नामांकित ही नहीं है । जब नामांकित ही नहीं है, फिर वो विद्यालय कहाँ से आएंगे । लेकिन दूसरी ही तरफ पंजी के अनुसार नामांकित सभी विद्यार्थियों के नाम सरकारी योजना से मिलने वाली राशि निर्गत होती है । पंजी के अनुसार नामांकित विद्यार्थियों के हिसाब से मध्याह्न भोजन बनता है । मध्यान भोजन योजना में गड़बड़ी की चर्चा भी आये दिन समाचार पत्रों में होती ही रहती है । उन बच्चों को अन्य सरकारी योजना का भी लाभ मिलता है । पंजी में नामांकित बहुत विद्यार्थी फर्जी है । मतलब हकीकत में वो है ही नहीं। यानी वो निर्गत होनेवाला लाभ आखिर जाता कहाँ है ?? सबसे बड़ा सवाल तो यही है ।

इसतरह से अगर पहली बिंदु, यानी आर्थिक दण्ड वाले नियम को लागू किया जाता है तो इसके कई सकारात्मक पहलू देखने को मिलेंगे ।

दूसरी बात, आदेश मे स्पष्ट कहा गया है कि जिन छात्र छात्राओं को अगले दिन विद्यालय नहीं आना हो, वो लिखित आवेदन देकर प्रधानाध्यपक से अनुमति प्राय कर ले । यह भी कहा गया कि अगर छात्र आवेदन लिखने में असमर्थ है तो अभिवावक आवेदन लिखेंगे और छात्र छात्रा अंगूठा लगाएंगे या हस्ताक्षर करेंगे । इस पहलू में सबसे खास बात यह है कि सामाजिक दायित्व जैसे शादी विवाह, घर समाज मे कोई मांगलिक कार्य या चिकित्सा स्वास्थ्य से सबंधित कारण होने पर प्रधानाध्यापक अनिवार्य रूप से छुट्टी निर्गत करेंगे । यानी इन बातों पर खास ध्यान दिया गया है आवश्यक परिवारिक कार्य या स्वास्थ्य आदि कारणों के समय कोई समझौता नहीं।

तीसरी बात, अनुपस्थित छात्र छात्राओं के साथ कड़ाई से पेश आया गया है । और सबसे बड़ी बात यही कड़ाई अनुपस्थित शिक्षकों के साथ भी बरती गई है । दरअसल सरकारी आदेश का हवाला देते हुए इस पत्र में स्पष्ट निर्देश है कि लगातार 28 दिन तक अनुपस्थित रहनेवाले छात्र छात्राओं का नाम नामंकन पंजी से हटा दिया जाए । यहाँ गौर करनेवाली बात है कि चुकी नामंकन पंजी में बहुत से फर्जी नामंकन है । यानी हकीकत में वो छात्र छात्राएं हैं हैं नहीं, तो विद्यालय कहाँ से आएंगे । फिर ऐसे छात्र छात्राएं का नाम जब नामंकन पंजी से हटेंगे तो उनको सरकारी योजना का लाभ या अन्य राशि आदि भी निर्गत नहीं होंगे । एक और बात है आदेश में स्पष्ट निर्देश है कि बिना अनुमति अनुपस्थित रहनेवाले शिक्षकों का वेतन कटौती की जाए । लगातार 7 दिन अनुपस्थित रहनेपर उन शिक्षको की बर्खास्तगी की कारवाई की जाए ।

यही सबसे ज्यादा दिक्कत है । लेट लतीफी वाले शिक्षकों को यह नियम नहीं पसंद आ सकता । कहने को शिक्षक, लेकिन विद्यालय से लगातार अनुपस्थित रहना जैसे इनके दिनचर्या में शामिल था । सबसे ज्यादा समस्या ऐसे ही लोगों के साथ है । जाहिर है शिक्षा व्यवस्था को चौपट करनेवाले लोग को कभी पसंद नहीं आएगा यह नियम और पत्र । क्योंकि इसमे सख्ती बरती गई है ।

वैसे शिक्षक जो सही में देश सेवा कर रहे हैं । अपने कर्तव्य के प्रति सचेत और जागरूक है वो तो सराहना कर रहे इस पत्र की । आखिर इस पत्र से पुरा शिक्षा व्यवस्था में एक अमूल चूक परिवर्तन देखने को मिल सकता ।

हो न हो, सीतामढ़ी जिला पदाधिकारी का यह पत्र अगर सकारात्मक परिणाम देता है तो शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाए । वैसे भी मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार भी विद्यलाय और शिक्षण व्यवस्था में सुधार के बड़े पक्षधर है । अब देखना है जिला पदाधिकारी का यह पत्र कितना सकारात्म परिणाम देता है । लेकिन प्रयास तो निःसंदेह सराहनीय है ।

सीतामढ़ी के शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए जिलाधिकारी द्वारा किये जा रहे प्रयास अब किसी परिचय का मोहताज भी नहीं है । समय समय पर विद्यालय का औचक निरीक्षण करके, बच्चों का खुद क्लास लेना, उनको पढ़ाना जैसे कार्य राष्ट्रीय समाचार ओत्रों और मीडिया चैनल की सुर्खियां बन चुकी हैं।

आप एक वीडियो यहां देख सकते हैं :

शिक्षा के क्षेत्र में उनके प्रयास को निम्न आर्टिकल से और बेहतर समझा जा सकता है । ये रहा लिंक :

http://www.sitamarhi.org/शिक्षक-और-कैरियर-मार्गदर/

इस तरह इस पत्र के तीनों बिंदु का क्रमावार विश्लेषण करने पर हम पाते हैं कि अगर सही मायने में इस पत्र को अक्षरशः लागू किया जाए तो शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा । विद्यालय में छात्र छात्राएं नियमित रूप से उपस्थित होंगे । फर्जी नामंकन पर रोक लगेगी । सरकारी योजना, मध्याह्न भोजन, अन्य राशि आदि का लाभ भी केवल सही मायने में विद्यालय में नामांकित छात्र छात्राओं को ही मिलेगी । लेट लतीफी या अक्सर अनुपस्थित रहने वाले शिक्षक भी नियमित रूप से विद्यालय आएंगे । फलस्वरूप विद्यालय में अध्ययन अध्यापन का कार्य नियमित रूप से होगा । सम्पूर्ण शिक्षा व्यवस्था को अगर बदलना है तो इस तरह के आदेश को निश्चित रूप से लागू किया जाना चाहिए । इस दिशा में सीतामढ़ी जिलाधिकारी डॉ रणजीत कुमार सिंह का यह पत्र स्वागतयोग्य कदम है ।

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आर्टिकल : रंजीत पूर्बे

Thanks !!!Sitamarhi Web Family

4 thoughts on “सीतामढ़ी डीएम के इस एक पत्र से शिक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलाव होंगे ।

  1. विद्यालय में होनेवाले सभी अव्यवस्था के जड़ में मध्याह्न भोजन योजना है। अभी भी प्रधानाध्यापक दबाव डालकर उपस्थिति से अधिक हाजरी बनवाते हैं।

  2. स्वागत योग्य आदेश जारी किया है जिलाधिकारी महोदय ने
    इसके लिए साहस की जरूरत है

  3. मै भी सितामढ़ी के रून्नीसैदपुर,तिलकताजपुर
    गॉव-रमनगरा के निवासी हू,मुझे शिक्षा आच्छ तरह से नही मिल पाया ,फिर भी मै नही हार मानी,और हमारे अंदर मे जो शिक्षा है और जो किताब से ग्राहण किया वही आज हम अनुग्राह नारायण कॉलेज पटना मे बीऐ पार्ट एक के छात्र हू,मुझे सितामढ़ी के अंदर जितना स्कूल है उस स्कूल मे सही से शिक्षा मिलने लगे तो मेरा जिला बहुत आगे निकलेगा,और हर छात्र-छात्रा एक ऐसा सोच बदलेगा कि वह भविष्य मे कुछ करने के लिये आक्रशित होगा,
    शिक्षा कि मतलब यह नही है कि हमे नौकरी मिल जाऐ तो मै सुख रहूगा ।
    शिक्षा के मतलब है कि समाज मे एकता और शिष्टाचार रखना और आपनो के बड़े को सदा आदर सम्मान करना।
    ईसी लिये मै शिक्षा ग्राहन कर रहा हू ।
    और मेरा समाज के एक -एक परिवार को शिक्षित करना है ।
    मै मानीय मुख्यमंत्री श्री नीतिश कुमार जी से मिलूगा,और हमारे सितामढ़ी मे शिक्षा व्यवस्था पर बात जरूर करूगा ।
    मेरा एक सपना है,कि आपका परिवार मेरा परिवार है और उनका सेवा और आज्ञा का पालन करना मेरा करतव है।

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