दारु बंदी और दोपहिया चालकों की शामत।

परम पूज्यनीय श्री नितीश कुमार जी, जिन्होंने मोहल्ले मोहल्ले, चौक चौराहे, छोटे शहर , बड़े शहर , गाँव गाँव के बीच दारु के ठेके खुलवाये थे, अचानक से पिछले अप्रैल उन्हें महाज्ञान की प्राप्ति हुई। राजद स्वरूपी महाबोधि वृक्ष के नीचे आये इस महाज्ञान से बिहार की उन्नति का पथ और सुगम हो गया।

उन्नति का पहला प्रभाव वैल्यू एडेड टैक्स पर पड़ा, 5 प्रतिशत से 6 प्रतिशत और 14 से 15 प्रतिशत। व्यापार करने वाले लोग भली भांति इस प्रगति से व्यथित हैं। जो पैसा दारु में जाता वो वैट में चला गया और वैट 69 भी नही मिला। Screenshot_20160905-222103

बिहार सरकार हर संभव प्रयास कर रही है की लोग दारु पीने की बात तो दूर, दारु के साथ फोटो अपलोड करना भी पाप है। इस बात का हम स्वागत करते हैं और प्रशंसनीय है।

सरकार सकते में है, की पैसा आएगा कहाँ से? केंद्र तो चाहती ही है कि बिहार बर्बाद हो, और हो भी तो नितीश जी के शासन काल में ही हो। तो केंद्र फण्ड देने में आनाकानी तो करेगा ही। बिहार में इंडस्ट्री लगने का तो सवाल ही नही है। नितीश जी के सह पर एक बियर प्रोडक्शन फैक्ट्री लगी थी, कार्ल्सबर्ग की, बाप बाप चिचिया रहा है दारु बंदी होने से। मद्द निषेध में उत्पाद पर भी तो रोक लग गया है।

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पढ़ लीजियेगा, बहुतों को तो पता भी नही है इस कानून के बारे में। उत्पाद विभाग केनिस गजट में अभी भी संभावनाएं है कि आप लाइसेंस लेकर दारु बना सकें। लेकिन हवा जो फैली है उसका असर तो लाजमी है।

अब आइये , आपको ट्रैफिक नियमों की भी जानकारी दे दें , और किस प्रकार से सरकार रेवेनुए पाने के लिए पुलिस के माध्यम से जेब काट रही है। मेरे पुलिस मित्र नाराज़ होंगे मेरे इस कथन से लेकिन कौनसा मैंने ये लेख उनकी खुशी के लिये लिखा है।

नीचे तस्वीर में कितना फाइन लगेगा इसका विवरण है। गौर से पढ़ें।

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अब आप याद कीजिये की आपने कितना कितना फाइन भड़ा है। क्या आपसे 200 रुपये का फाइन सबसे कम बताकर नही काटा  गया। ऐसेही जेब काटने के तरीकों से शायद सरकार को लगता है कि भरपाई कर ली जायेगी।

शायद जब गुजरात के ग्रोथ रेट से नितीश जी बिहार का ग्रोथ रेट का तुलानात्मक आंकलन कर रहे थे तो सबसे ज्यादा ग्रोथ दारु जे ठेकों से आये हुए पैसों से ही था। उस समय गुजरात ड्राई स्टेट था, आज भी है। आप उस समय नादिया बहा रहे थे और आज ड्राई स्टेट बनाकर दोपहिया चालकों के जेब काटने पर आतुर हैं।

ज्यादा दिन नही है , जब हाई कोर्ट में अपना ही केस ढीला करके सरकार एक कदम पीछे हट जायेगी। उच्च न्यायलय के आदेश से शराब फिर से बनने बिकने लगेगा और स्वेच्छा से राज्य सरकार मूक दर्शक बनी रहेगी।

आप तो जनता हैं, ग्रांटेड जनता, जिसे मुख्यमंत्री से कोई सवाल करने की न तो कोई चाहत है न ही जरुरत। तो ऐसे ही जाट पात पर वोट देते रहिये और मज़े में तमाशा देखिये।

 

मैं शराब बंदी का विरोधी नही हूँ, पीता था एक दो पेग, अब उसकी लालशा भी नही रही। मैं विरोध करता हूँ अंप्लानड डेवलपमेंट का, जो आपको अँधेरे में धकेल देगी।

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