नई दिल्ली टू बिहार, रेल सफर – आनंद

नई दिल्ली to Muzaffarpur के लिए Bihar smpark kranti मे हुरमुठाएले चढा हूं, दिल्ली मेट्रो की कठहल लोड टाईप भीड़ और मेट्रो में कूल डूड और ड्यूडनियों के रोमाण्टिक वार्तालाप से इतर Indian Railway की गोद मे बैठा हूं, बिल्कुल अलगे माहौल घर टाईप फिलिंग, आते वक्त़ दिल्ली मेट्रो मे दिख गयी थी, तोता टाईप ऐंजल टीना और उसके नखरों को सरेआंख उठाए, दूनो साईड कनपटा साईड से बाल छिलाए, जेल लगाकर बाल का एफिल टावर बनाए, हाथ मे बल्ला, पीतल रांगा पहिने कूल डूड मोनू, जो इन ड्यूडनियों के भर दिन के Bombay Stock exchange के संवेदी सूचकांक की तरह के बढते-घटते नखरों को उठाकर उसे मनाने की कोशिश कर रहा कूल ड्यूड मोनू.

डू यू लव मी बेबी? लव मी नाॅट टाईप के अध्यात्मिक वार्तालाप और उसके बाद भी ऐंजल टीना द्वारा इगनोर कर दिया गया. अब तो डूड मोनू का मुंह धुआँ गया है.

खैर, इन एलीट क्लास लोगों के साथ मेट्रो की यात्रा के पश्चात अपने औकात के नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंचा हूं, कायदे से देखा जाए तो, भारत का सबसे सहिष्णु स्थान है नईदिल्ली रेलवे स्टेशन, भले हम धर्म, संप्रदाय, casteism को importance देने वाले समाज मे हो, लेकिन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन सबको उपयुक्त स्थान देती है, स्टेशन के उतरवारी साईड वाला परिसर, ईहां भविष्यवाणी करते पंडित जी अपना ओम और रामरमा वाले गमछा का गांती बांध कर बैठे है, हनुमानजी, काली माई, गणेशजी के फोटो लगा रखे है, उधर तनिके हट के एक मौलवी जी भी हरियरका ललका कंबिनेशन वाला पोशाक पहिने झारु लेके बैठे है, पंडित जी के साईड से पुरवईया हवा से धूल और कभी-कभी हनुमानजी का फोटो उड़ के मौलवी साहेब के पास आ रहा है, मौलवी जी भी बड़े सम्मान के साथ बजरंगबली के फोटो को उठाकर पंडित जी को दे रहे है, गंगा-जमुनी तहज़ीब का इससे बढ़िया क्या मिसाल देखे, पंडित जी और मौलवी G को ये मतलब नहीं कि फ़ेसबुक पर रोडछाप टिनही लौंडे, जिसे धर्म का मतलब भी न पता वो धर्म के नामपर कुत्ता बिलाई जैसे लड़ता है. धर्म के नाम पर एक दूसरे को नीचा दिखाते फर्जी धर्मरक्षक, अबे ये है असली भारत, जहां राम और रहीम दोनो को एक माना जाता है. ये धर्म के नाम पर फेसबुक पर बक**दी नहीं करते है.

एक छोटा-सा भारत है, ई रेलवे स्टेशन। भारत की कई सारी भाषाएँ जैसे हिंदी, तमिल, तेलगु, कन्नड़, उड़िया, बंगाली, मलयालम और अंग्रेज़ी हमरे कान के भीतरका पर्दा को टच कर के भागे जा रहा है, तभी उद्घोषणा हुई है Bihar S kranti train platform no. 14 पर लगेगी, पलायन वेग से भागता हुआ plateform पर पहुंचा हूं, स्लीपर मे धक्कापेल भीड़ के बीच S1 मे 70 सीट पर बैठा हूं,पीछे से आवाज आई है

– “रे प्रभुआ चढलउ की न रे, जाए दे साले के भतार न चहरल होएतन त बिहान गीत गबईत अऐतन”

तभी प्रभुआ कमला पसंद गुटखा कल्ला मे दाबकर चिबाते हुए, बोला है –

“हं रे फेकना तोहरा से अगारिए चहर गए थे ”

उधर सामने वाली सीट के लिए एक बुढउ बाबा और अधेड़ चचा के बीच बहस चल रही है अरे हमर मौसा रेलवे में आफिसर है, वेटिंग है तो कपार हुआ हमहूं एही सीटवा पर जाएंगे जो उखाड़ना है उखाड़ लीजिए, साला सीट न हुआ India China के झोल का कारण, डोकलाम हो गया है, चचा पूरा अंड़ गए है, मतलब war निश्चित लग रहा.

बैग रखकर नीचे उतरा हू, एक मित्र को फोन आया है, वो भी जानेवाला है, तभी नजर गयी है आगे वाली जेनरल बोगी की ओर, मधुमक्खी के छता जईसे भीड़ देह पर देह सवार, रक्षाबंधन की भीड़ है, सब बस जगह ढूंढ रहे है, किसी तरह लटक के चले जाए, जिसकी शारीरिक क्षमता है वो ठेलठाल के कैसे भी घुस गया है, थोड़ें बुजुर्ग लोग इस धक्कामुक्की में नहीं चढ पाए है, आंखों मे बेचैनी लिए, इधर उधर भटक रहे है, sleeper class मे फाईन काटे जाने से डर रहे है, जेनरल बोगी में 4 लोग तो शौचालय में बैठा है, एक तो बिस्कुट भी खा रहा है, इतनी बुरी स्थिति है का कहें, एक बुढिया माई चंपा गई है, RPF ने हाथ खींच के निकाला है, अब पुलिस सबको एक लाईन मे लगाया है एक डंडा सबसे पिछिलका के पिछवाड़े पर जोर से मारा है, इतना स्थितिज उर्जा उत्पन्न हुआ है कि धक्का से आगे वाला चार गो आराम से घुस गया. फिर मारा चार गो फिर अंदर बोगी मे, सुरेश प्रभु जी की ये वाली अद्भुत लीला से अवगत हुए. स्लीपर की भी हालत जेनरल सी हो गई है.

ट्रेन खुल चुकी है, चाय बेचने वाला सब छरप छरप के जा रहा है, सूरदास जी भी चढे है, बगल वाली चाची दही और लिटी बोर के खा रही है, उपर बैठा मित्र भी अन्नपूर्णा देवी बनकर खुद लिटी खा रहा है और नीचे वालों के लिए झहरा भी रहा है, नीचे वाले चचा ने हिदायती लहजे मे समझाया है, अब वो सचेत हो गया, सामने एक बउआ चिचिया रहा, मेरा मित्र गाल सहलाकर उसे चुप कराने की कोशिश भी कर रहा, उसे मोबाइल चाहिए,

बगल वाले कंपार्टमेण्ट मे एक ललका झोरा लिए चचा ने political topic छेड़ा है,

– लालू जादो अब तो गया, महराज ऐतना कहीं घोटाला करता है, सब बाप्ते घोटालेबाज है, सभी लोगो ने हुंकारी देते हुए राजनौतिक चर्चा छेड़ डाला है. एक अन्य बुजुर्ग ने बोला है, देखिए चचा अपना नीतिशबा कम नय है, बरसतिया बेंग नियन है,

तभी चचा ने बोला है अरे महराज मोदी G से मिल के ठीक किया, अब बिहार का समुचित होगा, हो सकता है कि special status भी मिल जाए.

सच कहूं तो Indian Railway चलती फिरती यूनिवर्सिटी है, यहां से काफी कुछ सीखता हूं, यहाँ की भाषा सहज होती है, खुल्लम खुल्ला हर विषय पर चर्चा होता है, चचा बिहार से लेकर देश के विकास का खाका यहीं तैयार कर रहे है, सही मायनों में देखा जाए तो पॉलिसीज भी यही इन्ही लोगों के बीच बननी चाहिये, न कि एसी कमरे मे बैठकर बिसलरी ढारके पीते हुए policies बने, इनके लिए बननी चाहिये, ट्रेन मे जानवरों की तरह लदा के जाते हुए देखता हूं न तो कथित विकास की सारी बाते बेमानी लगती है, ट्रेनकी एक sleeper बोगी मे 70 सीट है और 200 से अधिक लोग चढे है, फिर भी रोना रोते है कि रेलवे घाटा मे चल रहा है, हां तो किराया बढाईए, कौन चाहेगा की शौचालय मे खड़े-खड़े आए, बुलेट ट्रेन हम ला रहे है, अच्छीबात है, लेकिन साल मे एकबार रक्षाबंधन, होली, छठ, दीवाली मे रजूआ, गुडुआ, पिंटुआ, चंदनमा टाईप घर के चिराग जब बहिन से राखी बंधबाबे, पूआ, ठेकुआ गांव आकर खाना चाहता है तो उसके पास एक ही विकल्प होता है, जानवरों की तरह ट्रेन में ठूंसा-लदा के जाए. सच में हम बहुत तरक्की कर लिए. तीन चार दिन पहिले The Indian express मे एक आर्टिकल पढे थे, देश मे सबसे ज्यादा वेटिंग टिकटियों को लेकर बिहार की ट्रेन ही जाती है, Bihar S. kranti no. 1 है,

मोदी चचा बुलेट लाईए, जरूर लाईए लेकिन हम आम आदमियों के लिए नार्मल ट्रेन ही उपयुक्त तरीके से चलवाईए, इंफ्रास्ट्रक्चर लमराईए, ताकि आपके न्यू इंडिया के हवामहल मे ये लोग भी एक-एक ईंटा रखकर बुनियाद तैयार कर सके, आपका असली भारत यहीं है अंकिल.

– आनंद

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