बस दुर्घटना, अपर्याप्त साधन, 50 लोगों की मौत।

दुर्घटनाग्रस्त बस।
दुर्घटनाग्रस्त बस।

सीतामढ़ी मधुबनी बस दुर्घटना और प्रसाशन

हर गली चौराहे पर काम धाम छोड़ के 200-250 का चालान काटने वाले पुलिस वालों पर अगर बसैठ के लोगों ने पत्थरबाजी की तो मैं खुल के ऐसे पत्थरबाजी का समर्थन करता हूँ, एक बस आप मुझे बता दीजिए जो सीतामढ़ी, दरभंगा , मधुबनी रूट में चलती हो और ओवरलोडेड ना हो। बस मालिकों से तो मैं उम्मीद ही नही करता, लोगों के मज़बूरी का फायदा उठाना तो उनका धंधा बन गया है, क्या सरकार से अपेक्षाएं करना भी गुनाह हो गया है?

क्या ओवरलोडेड बस को रोक कर चालान नही काट सकते? अरे कैसे काटेंगे महोदय, सबका हिस्सा पहले से बटा हुआ है। आर टी ओ, थाना , एक्साइज सबको मैनेज करके बस का धंधा चलाया जाता है। और किसको नही पता है, अगर इस बात को कहने पर मेरी गिरफ़्तारी होती है तो माननीय जज महोदय से आग्रह करूंगा कि सरकार से बस लिखित में मांग लें कि ऐसा कुछ नही होता। साला 30 सीट की लाइसेंस वाले बस मेजन 50 आदमी चढ़े कैसे? शुक्र मनाइये उन किस्मत वाले छत पर चढ़े लोगों का, जो आमतौर पर बिजली की तार से टकराकर प्राण की आहुति दे देते हैं, मगर इस बार कूदने का मौका मिल गया और जान बच गयी।

यार , ये प्रसाशन घुस कमाने, दारु पकड़ने , मोटर साइकिल चालकों को छेड़ने से ऊपर उठ कर के काम करेगी या नही? आपके जिला में क्रेन नही है दोस्तों, मतलब अगर खुदा न खासते कोई और बस किसी नदी या तालाब में घुस जाए तो मुजफ्फरपुर चाहे दरभंगा से मंगवाना पड़ेगा, आप भिखारी जिला में पैदा हो गए हैं। जहाँ सरकार के एहसान तले आपको जीना पड़ेगा। एहसान नही मानियेगा तो मेरी तरह फफक के रो परियेगा।

सुना है बस दुर्घटना में एक ओमनी एम्बुलेंस भी आया था, कौन सा गाली दें सूझ नही रहा है , एक ओमनी भेजा प्रशासन ने? किसको लादने के लोए आये थे? सोच कर आये थे को सब तो मर गए होंगे, लाद के घुसिया के चले जाएंगे? यही सोचे थे? अगर ये नही सोचे तो अदालत में मुझसे मिलिएगा, यही सवाल वहाँ भी पूछूँगा, निडर और निर्भीक।

मैं इस गुस्से में एक ही बात की भीख मांग रहा हूँ, मुलभुत आधारभूत सुविधाओं का। मत रहम कीजिये हमपे, जो हमारा अधिकार है और जिस काम के लिये सरकार और लोकतंत्र का जन्म हुआ है उसे पूरा कीजिये। हमें आपसे राजनैतिक बैर नही है, एक छोटे से एहसान की आशा है, पूरा कर दीजिए।  मुझे पता है कि सरकार 35 लोगों को ही मुवावजा देगी, क्योंकि स्वीकार नही कर सकती की क्षमता से ज्यादा लोग थे। सबके मुँह में पैसा ठूंस के फिर से सो जायेगी। मगर याद रहे , अगली बार कलम से वार नही होगा।

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