भुतही का प्रसिद्ध महावीरी झंडा : भव्य और शानदार तीन दिवसीय आयोजन ।

वीडियो में देखिए भुतही झंडा का मेला :

सीतामढ़ी के सोनबरसा ब्लॉक में एनएच 77 पर स्थित भुतही गाँव दो चीज के लिए बहुत ही प्रसिद्ध है : बालूशाही मिठाई और महावीरी झंडा ।

1954 ई. से ही हर साल दीवाली से 6 दिन पहले बहुत धूमधाम से भुतही में तीन दिवसीय महावीरी झंडोत्सव का आयोजन किया जाता । इस वर्ष भुतही झंडा 31 अक्टूबर,1 एवम 2 नवम्बर को है ।

सोनबरसा ब्लॉक स्थित भुतही गाँव का प्रसिद्ध ऐतिहासिक झंडोत्सव आस्था और लोक संस्कृति का एक महान पर्व है । यह झंडा पूरी तरह बाँस, लकड़ी और रंग विरंगे कागज से बना होता है । सन् 1954 से ही यह आयोजन बहुत ही हर्षोल्लास के साथ शानदार और भव्य तरीके से मनाया जाता है ।आस पास के गाँव के अलावा,दूसरे जिला और नेपाल से भी हज़ारों की संख्या में लोग भुतही झंडा देखने आते है। इस झंडा में महावीर पूजा के साथ ही भव्य जुलुस, भव्य मेला का आयोजन, झड़ा झारू/डांडिया खेल तथा अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन होता है । भुतही रैन में 150 फुट लंबा और 15 फुट चौड़ा दो दो झंडा को ‘आठ घोड़ा से युक्त दो रथ ‘ पर स्थापित किया जाता है एक भुतही गाँव का, दूसरा फूलकाहा गाँव का । इस पुरे आयोजन के दौरान जिला प्रशासन की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था होती है । भारी संख्या में अर्धसैनिक बल, पुलिस फोर्स जगह जगह तैनात रहते है । डीएम, एसपी समेत सभी वरीय पदाधिकारी झंडोत्सव के दिन खुद भुतही में रहते हैं । भुतही हाई स्कूल में प्रशासन का नियंत्रण कक्ष बना होता है । आसपास के सभी दूसरे गाँव मे पुलिस फोर्स की तैनाती की जाती है । सोनबरसा प्रखंड के हर गांव से, और दूसरे प्रखंडो से भी भारी संख्या मे खिलबाड़ी और जुलुस भुतही झंडा में पहुंचते है ।

जुलूस, शोभा यात्रा और महावीर पूजा 31 अक्टूबर को होगा भुतही चौक स्थित ब्रह्म स्थान पर । मुख्य मेला 1 नवम्बर को भुतही रैन में लगेगा । मेला 2 नवम्बर को भी लगेगा ।

पहला दिन : यानी 31 अक्टूबर को शाम करीब 5 बजे भुतही रैन से महावीर जी की शोभा यात्रा एक विशाल जुलूस के साथ भुतही चौक स्थित ब्रह्मस्थान के लिए निकलेगा । ये विशाल जुलूस करीब पांच छह घण्टा में नाचते, गाते, महावीर और शिव जी का जयकारा लगाते एक किमी की दूरी तय करते है । इस जुलूस में महिलौएँ भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेती है । हज़ारों की संख्या में महिलाएं नाचती गाती है । इस जुलूस में पर्याप्त संख्या में अर्धसैनिक बल, पुलिस मौजूद होते हैं । इस जुलूस में शोभा यात्रा में रथ पर महावीर मण्डप स्थापित किया जाता जिसमे महावीर जी की प्रतिमा होती है । जुलूस में एक ”छोटा झंडा” भी होता है । इसको भुतही में ”फुनगी” कहा जाता है । रात 10 बजे ब्रह्मस्थान पहुंचते है। वहाँ ”फुनगी” स्थापित किया जाता है । फिर सबसे पहले महावीर जी की पूजा होती है । भुतही गाँव के प्रत्येक घर और प्रत्येक परिवार से लोग यहाँ रात को पूजा अर्चना के लिए पहुँचते है । पूजा के बाद यहां रातभर पारम्परिक झंडा गीत के साथ झंडा खेल चलता है । नृत्य, नाटक, झडा झाड़ू खेल (डाण्डिया टाइप) रात भर होता है ।

महावीर शोभायात्रा और जुलूस

ब्रह्म स्थान पर भुतही झंडा खेल और रात भर होनेवला झडा झाडू, नाच गाना :

दूसरा दिन : यानि 1 नवबंर को सुबह सुबह ‘महावीर मण्डप’ और ‘फुनगी झंडा को ब्रह्म स्थान से पुनः भुतही रेन लाया जाएगा । और इसे रैन में महावीर मन्दिर प्रांगण में स्थापित किया जाएगा । उसके बाद करीब 10-11 बजे भुतही रैन में महावीरी झंडा स्थापित किया जाएगा । खण्ड खण्ड में बने झंडा को आपस मे जोड़कर लगभग 150 फ़ीट ऊंचा झंडा को खड़ा करना मामूली बात नही है । महावीरी झंडा को पहले लगभग 15-15 फ़ीट के अलग अलग 10 खण्ड में बनाया जाता है । फिर दसो खण्ड को जमीन पर लेटा कर आपस मे जोड़ दिया जाता है । फिर जमीन पर ही लेटे विशाल झंडा को आसमान में खड़ा किया जाता है । चुकी सारा भार सबसे नीचे वाले खण्ड पर होता है । इसके कारण नीचे वाले खण्ड को बहुत ही मजबूत और चौड़ा बनाया जाता है । लोगों की साँसे अटकी होती है कि झंडा अच्छे से खड़ा हो जाये । सैकड़ो लोग बांस,रस्सी के सहारे इसे खड़ा करने में मदद करते है । झंडा ज्योहीं खड़ा हो जाता । नगाड़ा, ढोल,तासा बजने लगता है । लोग खुशी से नाचने लगते है । महावीर जी, शिव जी का जय जयकार नारा लगाया जाता है । झंडा खड़ा होने के बाद इसको वहां से 50 कदम दूर मन्दिर प्रांगण में स्थापित किया जाता है । 150 फ़ीट ऊँचा खड़ा विशाल झंडा को 50 कदम दूर चल के ले जाना मामूली बात नही । मन्दिर प्रांगण में पहले से 4 घोड़ा से युक्त रथ बना होता है । उसमें झंडा को फ़ीट कर दिया जाता है । सैकड़ो रस्सी के माध्यम से झंडा को सीधा और स्थिर खड़ा किया जाता है । फिर मेला धीरे धीरे लगने लगेगा । शाम होते होते मेला पूरी तरह अपने रंग में होगा । हज़ारो लोग दूर दूर से आएंगे भुतही महावीरी झंडा का दर्शन करने ।

देखिये कैसे खड़ा होता 150 फिट उँचा भुतही महावीरी झंडा

फुलकाहा गाँव वासी द्वारा वहाँ के झंडा को लाकर भुतही रैन में खड़ा किया जाता । देखिये कैसे

दूसरी खास बात भुतही से कुछ ही किमी दूर गाँव फुलकाहा का महावीरी झंडा भी भुतही रैन में स्थापित किया जाता । 1 नवम्बर को दोपहर में फुलकाहा के लोगों द्वारा झंडा को लेटाकर पैदल चलकर, झंडा को सैकड़ो लोग कंधा पर रखकर भुतही गाँव लाते हैं। उनके साथ हज़ारों लोगों की जुलुस होती । सब लोग महावीर और शिव जी का नारा लगाते भुतही पहुंचते हैं और भुतही झंडा के बगल में ही फुलकाहा झंडा को स्थापित किया जाता ।

तब दो गगनचुम्बी महावीरी झंडा को देखने के लिए लाखों लोग पहुंचते हैं । दोपहर से भव्य और मेला लगेगा । सीतामढ़ी शहर और दूसरे जिला से ढेर सारे चाट, समोसा, मिठाई वाले, एक से एक करतब दिखाने वाले, मौत का कुआँ, बड़ा बड़ा झूला सब आएगा भुतही झंडा मे ।

तीसरा दिन : यानी 2 नवम्बर को भी भुतही रैन में महावीरी झंडा का मेला लगेगा ।

शांति सदभाव के साथ झंडा मनाया जाता । जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया जाता । इलाके के प्रबुद्ध एवम सामाजिक लोगों द्वारा इसे शांति सदभाव के साथ मनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाती है ।

भुतही झंडा को समाचार पत्रों में भी प्रमुखता से कवरेज किया जाता :

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1 नवम्बर को जरूर पधारिये भुतही गाँव प्रसिद्ध महावीरी झंडा के दर्शन के लिए । औऱ भुतही का प्रसिद्ध और स्वादिष्ट बालूशाही तथा रसबरी का स्वाद जरूर लीजिये ।

इस पूरे भुतही झंडा का भरपूर लाइव प्रसारण #सीतामढ़ी_पेज पर किया जाएगा https://facebook.com/Sitamarhi

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आपका : रंजीत पूर्बे

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