माई के पंडाल करे चोएं चोएं, स्वर – खेसारी लाल, मसूरी लाल, उड़ीद लाल – आनंद


माई के पंडाल करे चोएं चोएं, स्वर – खेसारी लाल, मसूरी लाल, उड़ीद लाल , केरईया लाल

नवरात्र चल रहा है, पूरा सोशल मीडिया तो अध्यात्मिक मोड में है, साल के बारहो महीना, दिन की शुरूआत चाईनीज मोबाईल से भोजपूरी अश्लील गाना सुन के उठने वाला ललनमा भी पिछले आठ दिनों से भक्ति में रमा है। सुबह-सुबह दिन की शुरूआत ही होती है, सभी को व्हाटसप पर दनादन भक्तिमय मैसेज भेजने से, फेसबुक पर फीलिंग हैप्पी एंड धार्मिक विथ 21 अदर्स को टैग करके स्टैटस डालने से. पूरे दस दिनों तक खैनी, बीड़ी, चिलम, मुर्गा सब बंद.

दस दिन तक चलेगा जय दुर्गा, जय दुर्गा, जय दुर्गा और दसवें दिन से दे मुर्गा, दे मुर्गा, दे मुर्गा…..,

आस-पास के गांवों मेला भी लग चुका है, पिपही, घिरनी, फुलौना, बचका-कचरी-चप, जलेबी और बालूशाही की मादक गंध चहुंओर विसरित हो रही है, बच्चों में तो अलगे उत्साह है, सबका अपना-अपना प्लान है, गोलूआ अलगे मुंह फुलाए हुआ है कि दशमी के दिन मेला में जाएंगे और मौत का कुंआ देखेंगे और बड़का झुलुआ पर हम झुलेंगे, बस खाली पापा हमरा 100 रूपया दे दे। उधर चंदनमा ब्लेड से हाथ काट के खून से लव लेटर लिख के रखा है कि इसबार अगर सुनितिया मेला में भेटा गई तो पक्का ई प्रेमपत्र दे देंगे, भले उसके भाईयों द्वारा विधिवत तरीके से कूटाए।

ललनमा तो इस बार भी टेंसन में है कि 32 साल उमिर टप गया, बियाह शादी हो नहीं रहा, क्लास में साथ साथ पढ़ने वाली फूलमतिया के 3 बच्चे है, दुर्गा पूजा में हर बार नहिरा(मायके) आती है, उसके बच्चे जब-जब गोद में आते हैं मामा-मामा कह के निकल जाता है, करेजा पर तो करैत सांप लोटने लगता है, जईसे तईसे करेजा पर बॉक्साईट चट्टान रख के ललनमा बर्दाश्त कर लेता है.

सावन महीना में एक अगुआ आया भी था तो पड़ोस वाले हड़काके भगा दिए कि लईका चिलम सुरूकता है, अब बस दुर्गा माई से आस बची है, इस बार नवरात्र उपवास भी कर रहा है कि बस माई दुर्गा लगन लगा देओ. नवमी के दिन महरानी स्थान में खंसी काट के बलि चढ़ाएंगे, दू ठो कबूतर भी चढ़ाएंगे। हे दुर्गा माई लगन लगा देओ.

ललनमा पिछले साल की तरह इस साल भी पूजा समिति का सचिव भी बना है, रिस्पॉंसिबलिटी का उपयुक्त तरीके से निर्वहन कर रहा है। बगल वाले गांव के पूजा समिति से कंपटीशन भी है, कंपटीशन है, साउंड लाईट और डी.जे. का, क्योंकि वर्तमान समय में साउंड लाईट, डी.जे. और पूजा का अन्योनाश्रय संबंध है, जिस समिति में यह व्यवस्था बढ़िया, वहीं सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र, नहीं तो मूर्ति तो हर जगह बनती है, विधिवत तरीके से पूजा तो हर जगह होता ही है।

बगल वाले पूजा समिति के अध्यक्ष-सचिव रामनिहोरा जी और ललनमा में तो बिल्कुले न बनता है, पिछले साल पड़ोस गांव की समिति द्वारा नवमी के दिन आयोजित आर्केस्ट्रा देखने गया भी था तो इनको वो आजादी नहीं मिली, स्टेज पर चढ के महिलाओं पर कमेंट करने का अवसर न मिला था, स्टेज पर चढ़ने और महिलाओं पर फब्तियां कसने के चक्कर में इस समिति के अध्यक्ष, सचिव दूनों को पड़ोस के गांव वाले ने कंबल कुटाई की गई थी. दोनो समितियों बीच तो इजरायल-फिलीस्तीन जईसा माहौल है।
इस साल भी कंपटीशन जोरों पर है, अपोजिट पूजा समिति की ओर घुमाके होर्न पर होर्न बांधे जा रहा, 2-2 किलोमीटर दूर तक रोड के किनारे-किनारे होर्न टांगे जा चुके थे, ललनमा को पता चला की अरे साउंड लाईट में बगल वाली समिति से पछुआ रहें है तो जिला के सबसे धाकड़ डी.जे वाले से संपर्क किया गया, कंपटीशन में इसकी साईड से भी तगड़ा व्यवस्था किया जा चुका है, इस बार दोनों समितियों द्वारा ऑर्केष्ट्रा बुलाया जाएगा, कुछ बजट कम पड़ रहा था तो रोड घेर-घेर कर ऑटो, बस, जीप वालो सभी से पूजा के नाम पर जबरदस्ती चंदा भी वसूले गए, नवमी और दशमी को ऑरकेष्ट्रा का भी आयोजन तय है, भोजपूरी अश्लील गानों की धुन पर जमकर थिरके जाएंगे,  भसान के लिए भी अलग से नागिन, करैत और ढ़ोड़वा सांप डांसर्स की व्यवस्था की गई है।

दोनों साईड से खेसारी लाल, मसूरी लाल, केरईया लाल के उटपटांग भोजपूरी अश्लील गानों का भक्ति वर्जन

– माई के पंडाल करे चोएं चोएं चोएं, टाईप गाने

बजने शुरू है, ये टिनही गायक हर मौसम-हर त्योहार में कुकुरमुत्ते की भांति उगते है। और अश्लील भोजपूरी गानों का भक्ति वर्जन कुछेक शब्दों को चेंजकर तैयार कर देते है। करोड़ों का कारोबार पक्ष जुड़ा है इनसे.

यकीन मानिए कि महिषासुर भी यदि इन गानों को सुनके अर्थ समझ ले तो गदा चलाके इन गायको का कपार फोड़ देगा. बचपन में सुनते थे, बस गुलशन कुमार और अनूप जलोटा जी का एलबम आता था, आज अगर आप यूट्यूब पर थोड़ा धार्मिक होते हुुए केवल भक्ति सांग्स सर्च करके देखिए कितने उटपटांग गानों के सजेस्टेड विडियो सामने आ जाएंगे. कपार ईंटा से पीट लीजिएगा.
दावा करता हूं कि पूरे विश्व में धार्मिक सहिष्णुता का इससे बेहतर उदाहरण और कुछ नहीं हो सकता है, चूंकि वक्त ऐसा है न गुरु कि, धर्म के नाम पर कुछ लिखने भर से गला काट दिया जाता है, प्रतिबंध लगा दिया जाता है, कार्टून बनाने भर से शार्ली एब्दों जैसी मीडिया पर अटैक हो जाता है, कट्टरता के इस दौर में इतनी सहिष्णुता, लेकिन हमारे यहां सब कुछ एक्सेप्टेबल है, आप भोले बाबा के माथा पर नारियल बजार के फोड़ दीजिए, किस्म-किस्म के गांजा उनके नाम पर पीजिए, डी.जे. पर विथ चिलम का जश्न मनाईए, सब चलता है।

निष्कर्षतः यही कहना चाहता हूं, सहिष्णुता का एक ही नाम है हमारा सनातन धर्म, यहां सब कुछ चलता है, अल्लाह और गॉड को और उनके समर्थकों को भी हमरे दुर्गा माता जईसे सहिष्णु होना चाहिए, शायद छोटी-छोटी बातों से भगवान को कोई फर्क नहीं पड़ता, आप मूर्ति स्थापना कीजिए और साईड में ऑरकेष्ट्रा बुला कर बार बालाओं को नचवाईए, खुद नागिन, गेहुंअन, ढोड़वा सांप बन के नाचिए, मां दुर्गा को कोई टेंशन नहीं है।

और हां, अंत में इता ही लिखूंगा कि ललनमा टाईप हर उस योद्धा के लिए आप भी मां दुर्गा से विनती कीजिए कि सावन तक लगन लग जाए।😍

जय माता दी 

आनंद कुमार,
सीतामढी

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