मिलिए बिहार के इस यूथ आइकन से!

Ashwini jha

प्रतिभा हो या हौसला,इसका उम्र से कोई लेना देना नहीं होता। इस बात
का जीता जागता सबूत हैं अश्विनी झा जो बेहद कम उम्र में
मानवता की सेवा के लिए कई सम्मान पा चुके हैं। पहले वे २२
फ़रवरी को वर्ल्ड स्काउट डे के अवसर पर राष्ट्रपति प्रणब
मुखर्जी द्वारा लार्ड बेडेन पॉवेल नेशनल अवार्ड २०१६ से सम्मानित किये
जा चुके हैं और अब उन्हें अटल मिथिला सम्मान दिया जाना है। अटल मिथिला सम्मान
पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
जी के सम्मान में स्थापित किया गया था और यह सम्मान उन्हें दिया जाता
है जिनकी जडें मिथिला में हों और उन्होंने राष्ट्रीय या
अन्तराष्ट्रीय स्तर पर कोई उपलब्धि हासिल की हो। यह
सम्मान उन्हें १० अगस्त को दिल्ली में लाल कृष्ण
आडवानी के द्वारा दिया जाएगा। पहले भी उन्हें “मिथिला गौरव” और “मिथिला विभूति” सम्मान मिल चुका है।
मूल रूप से बिहार के दरभंगा के बेनीपुर प्रखंड के सजुआर गांव के
रहने वाले अश्विनी झा ने 2001 बैच में सैन्य अधिकारी
की परीक्षा पास की थी। आर्थिक
समस्याओँ से लड़ते हुए इन्होंने अपनी पढाई छात्रवृति से
पूरी है। शायद इसीलिए उन्हें सफलता के बावजूद
भी घमंड इन्हें छू भी नहीँ गया है।फिलहाल
वो जमशेदपुर के सुंदरनगर स्थित रैपिड एक्शन फाॅर्स के बटालियन 106 में सेकेंड
इन कमांड के पद पर कार्यरत हैं।
Patnabeats से अश्विनी झा की लम्बी
बातचीत हुई जिसमे उन्होंने काफी प्रेरणात्मक बातें
कहीं है। उस बातचीत के कुछ अंश आपके लिए प्रस्तुत
हैं:#
मैं : आपको अटल मिथिला सम्मान दिया जा रहा है इस बारें में आप क्या कहना
चाहेंगे?
अश्विनी झा: मैं बहुत ही गर्वान्वित महसूस कर रहा
हूँ की इतने बड़े बड़े नामों के बीच मेरा नाम है और मुझे
सम्मान मिल रहा है। भारत में आमतौर पर किसी के काम को पहचान
मिलने में वर्षों निकल जाते हैं और मुझे अपने जीवन के
तीसरे दशक में ही सम्मान मिलना गर्व की बात
है। मेरा मानना है की अगर कम उम्र में आपके काम को सराहना मिले
तो आपकी हिम्मत भी बढती है और अपने
बाकि के जीवन को उस काम को समर्पित कर देने की प्रेरणा
भी । सही समय पर मिला सम्मान और सराहना देश
की उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है । अगर
मीडिया ने मुझे नही सराहा होता तो शायद मेरे काम को
भी इतनी जल्दी पहचान नही
मिलती।
मैं: आप अपनी प्रेरणा का स्रोत किसे मानते हैं ?
अश्विनी झा: मेरी प्रेरणा का स्रोत बेशक मेरी
अर्धांगिनी रितु झा है जिसने हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
जब भी मैं किसी ऑपरेशन के नाकाम हो जाने के बाद
हिम्मत हार कर घर लौटा वो हमेश मुझे कहती “सत्य हमेशा परेशान
हो सकता है पर पराजित नहीं”। और मैं फिर से उठ खड़ा होता था
अपनी लड़ाई लड़ने के लिए। बक्सर में मेरी पोस्टिंग सबसे
मुश्किल वक़्त था और उस दौरान एक ऐसा समय आया जब मैं अपनी
नौकरी छोड़ देना चाहता था। उस वक़्त मेरी
पत्नी ने ही मुझे हिम्मत दी थी ।
और अब मैं गर्व से कहता हूँ की आज मैं जो कुछ हूँ अपने बक्सर
के कार्यकाल की वजह से ही हूँ।
मैं:आपने पांच साल तक झारखंड के नAshwini and Rituक्सल प्रभावित क्षेत्रों में मानवता
की सेवा की है। बिहार के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में
मानवता की सेवा कैसे की जाये इस बारे आप कुछ सुझाव दें
चाहेंगे ?
अश्विनी झा: नक्सलियों में टॉप रैंक के नक्सली एक शानदार
ज़िन्दगी जीतें हैं जबकि एक आम नक्सली
बहुत मुश्किल जीवन जीता है। उन्हें अगर
सही राह दिखाई जाये तो वो नक्सलवाद को छोड़ सकता है। इसके लिए
उन्हें ये समझाना जरुरी है की बंदूकों से लड़ाइयाँ
नहीं जीती जाती। उन्हें
जीने के और भी तरीके सिखाये जाने
चाहिए,रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराये जायें। नक्सलियों के बच्चों को शिक्षित बनाया
जाये ताकि उन्हें बन्दूक न उठानी पड़े। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों अधिक
से अधिक स्कूल बनें ताकि बच्चे आसानी से वहां तक पहुँच सकें। उन
इलाकों में जोर शोर से सिविक एक्शन प्रोग्राम किये जायें जिनमे नक्सलियों के बच्चों के
बीच किताबें,कपडे जूतें कुछ भी बांटा जाये। खेल प्रतोयोगिताएं
की जायें ,पुरस्कार दिए जायें ताकि वो आम लोगों से खुद को अलग न समझें
और एक आम जीवन जीने का सोचें न की
नक्सली बनने का।
मैं: युवा वर्ग के लिए आप क्या सन्देश देना चाहेंगे?
अश्विनी झा : भारत की ६० प्रतिशत आबादी
युवा है। सरकार का काम उनके लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध करना है जबकि
युवाओं का काम मेहनत करना है। मेरा मानना है की अगर हमारे युवाओ
को उचित समय पर सही मार्गदर्शन मिले तो वो कुछ भी कर
सकते हैं। हमारी शिक्षा प्रणाली पर काफी
सवाल उठते आये हैं और शिक्षा प्रणाली की खामियां अब
एक देशव्यापी समस्या बन चुकी है पर इसका हल केवल
सरकार के पास ही नही बल्कि युवाओं के पास
भी है। परीक्षा में सिर्फ और सिर्फ अपनी
मेहनत के सहारे आगे बढ़ने की सोच होनी चाहिए क्यूंकि
सिर्फ नम्बरों से किसी विद्यार्थी की क्षमता का
अन्दाजा नही लगाया जा सकता। बिहार का प्रतिभा पलायन भी
एक चिंता का विषय है।
हम अश्विनी झा को अटल मिथिला सम्मान के लिए बहुत बधाई देते हैं
और उम्मीद करते हैं वो इसी तरह समाज क लिए एक
प्रेरणा के स्रोत बने रहेंगे।

मूल लेख Patnabeats पर प्रकाशित

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