मेरा प्यारा शहर सीतामढ़ी

Railway Station
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बहुत याद आता है मुझे अपना शहर
वहाँ  बिताया  हर लम्हा , हर पहर
सब लोग वहाँ के मुझे अपने लगते है
दिल्ली आज भी लगता है अजनबियों का शहर।।

जिंदगी की जद्दोजहद में मैंने अपना शहर छोड़ दिया
कुछ हासिल करने की चाह में मैंने राह को मोड़ दिया
जब दूर गया अपने शहर से तब इसका अहसास हुआ
इसी ने मेरा मेरे शहर से रिश्ता और गहरा जोड़ दिया।।

याद आती  है  वहाँ  बिताये गोयनका  कॉलेज की शाम
कड़ी धुप में खड़े हम और लंबा लगा मेहसौल का जाम
गुदरी की भीड़ भार बाज़ार से सब्जी लाना और
लखनदेई पुल पर ठेले वाले से पुछना आम के दाम।।

किरण चौक पर गरमा गरम जलेबियाँ खाना
सिंहवाहिनी मार्केट में मजेदार चुरा घुघनी चबाना
कृष्णा स्वीट्स के समोसे और चाट
और ये पढ़ते हुए आपके मुँह में पानी आना।।

नूतन में सिनेमा देखने में बड़ा मज़ा आता था
वहाँ 10 रु में पॉपकॉर्न( लावा) मिल जाता था
पान खा के लोग गर्व से सीट के नीचे थूक देते थे
हीरो और हीरोइन के एंट्री पे तो गर्दा उड़ जाता था।।

ये सब मजा कहाँ आता है इतने बड़े शहर में
भीड़ में होकर भी अकेला हूँ समंदर के इस लहर में
ये छोटी छोटी यादें कभी कभी अकेले हँसा देती है
तब मन करता फिर से लौट आऊँ अपने शहर में।।

4 thoughts on “मेरा प्यारा शहर सीतामढ़ी

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