शादीशुदा जोड़े का बैचेलरहुड भाग दो: बैचेलरहुड का दी एंड

 

 

 

नेताजी के घर में तूफ़ान आ गया है। अब ये मुआ तूफ़ान सिर्फ नेताजी के घर में क्यों आया है। अरे जी हम उस तूफान की बात नहीं कर रहे। बात ये है की अभी अभी खबर मिली है की मैडम जी की पढाई ख़त्म हो आई है और जल्दी ही मैडम जी हमेशा के लिए नेताजी के साथ रहने आ रही हैं। नेताजी की हालत को शब्दों में बयान करना  मुश्किल है। तोते उड़ चुके हैं और कौए कांव करने लगे है। ऐसा नहीं है की नेताजी मैडम जी के आने से खुश नहीं है बात बस इतनी है की आजादी किसे प्यारी नहीं होती है। इस दुःख में नेताजी अकेले नहीं हैं उनके यार दोस्तों में भी खासी दहशत है। मैडम जी थोड़ी गर्म दिमाग की हैं पता नही कब किसका हुक्का पानी बंद करवा दें। सब यही सोच रहे हैं पता नही अब उन मुशायरों का उन महफ़िलों का स्वाद दुबारा नसीब हो न हो इसीलिए बेचारे आजकल ओवरटाइम कर रहे हैं और आजकल मित्र समागम रात में ही नही दिन में होने लगा है, सप्ताहांत अब सप्ताह के हर दिन मनाया जाता है।

अब मैडम जी के हालात का जायजा लिया जाये, मैडम जी के पास खुश होने की तमाम वजहें हैं दो साल का वनवास समाप्त हो चुका है और नए जीवन की असली शुरुआत हो चली है। पर अब मैगी खाकर सोने के दिन गए, नेताजी को जो पसंद हो वही खाना और पकाना होगा। नेताजी अपने दो दिन के प्रवास में मैडम जी के घर में जो रायता फैलाते थे वो अब रोज़ फैला करेगा। घर पर कोई इंतज़ार कर रहा है ये सोच कर जल्दी घर आने का मन करेगा।दोनों की अपनी अपनी मुश्किलें हैं पर खुशियों की दस्तक भी हैं। मैडम जी को छिपकली से डरने की जरुरत नही पड़ेगी और नेताजी को जला अधपका खाना नही खाना होगा। घर की रंगत तो बदलेगी ही नेताजी की सूरत भी बदलेगी, बालों से लम्बी दाढ़ी रखने की इज़ाज़त जो नही होगी अब। हर सुख दुख को बाँटने वाला पास हो तो जीना आसान हो जाता है।

तो अब एक नज़र दोनों पक्षों की तैयारियों पर। मैडम जी तो अपने दो साल के सामान को समटने और ठिकाने लगाने में लगी है। पर नेताजी के यहाँ आक्रामक तयारी चल रही है। बरसों के बचे हुए डिटर्जेंट की कुर्बानी देने का वक़्त आ गया है। फर्श पर जम कर टाइड घिसा जा रहा है। पार्टियों के अवशेषों को घर के पीछे गढ्ढा खोद कर दफनाया जा रहा है। घर के इतिहास में पहली बार बाथरूम में Odonil लगा दिया गया है जिस से उस बेचारे सफाइकर्मी को भी थोड़ी सहूलियत हुई जिसने नेताजी के बाथरूम को साफ़ करने का साहस दिखाया था और जंगे मैदान में बेहोश होते होते बच गया था । कोने कोने से गंदे कपड़ों को ढूंढ ढूंढ कर धोया जा रहा है और वाशिंग मशीन ने आत्महत्या के प्रयास शुरू कर दिए हैं। मोजों को अचानक से उनके बिछड़े भाई बहन मिलने लगे हैं। बरतनों को फेयर एंड लवली का निखार मिल गया है। चूहों को मैडम जी के प्राण बचाने के खातिर अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ रही है, उन्हें प्यार से लड्डू में दवा मिला कर मारा जा रहा और बाइज्जत घर के पिछवाड़े में अंतिम संस्कार किया जा रहा है। दोस्तों को पहले ही चेतावनी दे दी गयी है वक्त देख कर ही पधारे और खली हाथ पधारने पर खाली पेट लौटना पड़ सकता है, निक्कर में पधारने पर जुर्माना भी लग सकता है जो GST मुक्त होगा।

अब देखना है मैडम के आगमन पर नेताजी घर में जश्न मनेगा या शामत आएगी। आँखों देखा हाल जानने के लिए तीसरे भाग का इंतज़ार करें। पिछले हिस्से को आप क्लिक कर के पढ़ सकते हैं।

2 Comments

Add a Comment

Connect with us on: