सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था…

बिहार सरकार (सुशासन बाबू) की महत्वाकांक्षी योजना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना वाली बात झूठी साबित हो रही है सीतामढ़ी के कई स्कूलों में जमीनी हालत कुछ ठीक नहीं है हमने सीतामढ़ी के कई स्कूलों का दौरा किया हमने पाया कि स्कूलों में बच्चों के पढ़ने के लिए पुस्तके उपलब्ध नहीं है साथ ही बच्चों की शिकायत मिड डे मिल के लिए अभी भी जारी है, बच्चे अक्सर शिकायत करते हैं खाने की क्वालिटी खराब होने की और समय पर उनको छात्रवृत्ति भी नहीं मिल रहा है, अब बात करते हैं चकमहिला मध्य विद्यालय की जहां सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत एक नया भवन निर्माण हुआ है लेकिन पुराने भवन की स्थिति जर्जर हो गई है. वहीं आपको सीतामढ़ी के नगर परिषद द्वारा संचालित आदर्श नगर पालिका मध्य विद्यालय के बारे में भी बताना चाहेंगे वहां के स्कूल अपने आप में मिसाल कायम करते हैं वहां बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ स्वच्छ वातावरण रखा गया है लेकिन सवाल यह है कि जो स्कूल राज्य सरकार के अंतर्गत आती है उन स्कूलों की हालत आखिर क्यों इतनी बदतर होते जा रही है क्या शिक्षा विभाग सक्रिय रुप से कार्य नहीं कर रहा है या फिर शिक्षक शिक्षा विभाग के ऊपर बाहरी काम का दबाव ज्यादा है. हमने मध्य विद्यालय मधुबन के एक शिक्षक से बात की जिनका नाम सुनील कुमार है उनका कहना है कि शिक्षा विभाग को पढ़ाई के साथ-साथ अन्य बाहरी कामों को सौंप दिया जाता है जैसे कि ODF इसमें प्रमुख मुद्दे हैं ODF का कार्य शिक्षकों को दे दिया जाता है जिसकी वजह से वह क्लास का संचालन सही ढंग से नहीं कर पाते हैं. मध्य विद्यालय मधुबन में भी किताबों की भारी कमी देखी गई है बच्चों को किताब नहीं मिल रहा है जिससे बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है. इसको लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी से लेकर राज्य सरकार के शिक्षा मंत्रालय तक बिना किसी कार्यवाही के अच्छे से नींद ले रहे हैं और फिर मैट्रिक के रिजल्ट में सब कमियां निकलने लगेंगे.
Report:- Rahul Lath

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