सीतामढ़ी, कहानी बेटियों के संघर्ष की।

सीतामढ़ी में भ्रूण हत्या का पाप लोग बढ़ चढ़ के कर रहे हैं, इसे हमें आपको मिलकर रोकना होगा।

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कहानी बेटियों के संघर्ष की ।
शीर्षक पढ़ कर आपको ये लगा होगा की मैं बेटियों के जीवन के संघर्ष के बारे में बात करुँगी। अगर ऐसा है तो आप गलत हैं। यहाँ मैं उस संघर्ष के बारे में बात कर रही हूँ जो उन अजन्मी बेटियों को जन्म लेने के लिए करना पड़ता है। इंसानियत कम होती जा रही है ये तो जगजाहिर है पर माता पिता की निर्ममता हज़म होने वाली बात नहीं है । ये अजन्मी बेटियां बस एक अल्ट्रासाउंड के कारण मारी जाती हैं जिसे इसलिए किया जाता है ताकि बच्चे के विकास पर नज़र रखी जा सके। पर पैसे की भूख भगवान् कहे जाने वाले डॉक्टरों को “जलेबी खिलाईये” (अर्थात गर्भ में लड़की है), “रसगुल्ले खिलाईये” (अर्थात गर्भ में लड़का है) कहने पर मजबूर कर देती है। ऐसा नहीं है की इस जुमले कह देने के कारन अल्ट्रासाउंड की फीस बढ़ जाती है। असली मतलब तो इस रहस्योद्घाटन के बाद होने वाले गर्भपात या कहूँ की भ्रूण हत्या से है। भ्रूण हत्या को गैरकानूनी बता कर मनमानी फीस वसूलने से है। आखिर डॉक्टर बनने में इतने पैसे जो लगाये हैं, और अपने बेटे बेटियों को भी डॉक्टर बनाना है, बेटी के लिए डॉक्टर दामाद लाना है उसके लिए भी तो पैसे चाहिए न! मैं यहाँ डॉक्टरों का अपमान नहीं करना चाहती और न ही किसी डॉक्टर की भावना को आहत करना चाहती हु। मैं ये सब इसलिए कह रही हूँ क्यूंकि व्यक्तिगत तौर पर मैं आहत हूँ, क्षुब्ध हूँ यह जान कर की जिस डॉक्टर को मैं अपना आदर्श मानती थी वो भी भ्रूण हत्या के पाप में शामिल हैं और सबसे बड़ा धक्का मुझे तब लगा था जब मुझे पता चला की उन्होंने मेरी माँ को भी मेरी गर्भ में हत्या करा देने की सलाह दी थी। डॉक्टरों की इसमें अहम् भूमिका इस लिए है क्यूंकि अगर वो ईमानदारी से अपने पेशे को निभाएं तो शायद किसी भावी माता पिता को पता ही न चले की गर्भ में पलने वाला बच्चा लड़का है या लड़की और भ्रूण हत्या की समस्या ही ख़त्म हो जाएगी।आंकड़ों के मुताबिक बिहार में एक हज़ार से भी ज्यादा अल्ट्रासाउंड क्लिनिक हैं जिनमे थे अधिकतर का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। ऐसे क्लीनिकों में लिंग जांच करना बहुत आसान हैं क्यूंकि इसका कोई कागज़ी प्रमाण नहीं होता। ऐसे में इन जांचों पर यकीन कर के अपने बच्चों को मार डालने वालों पर मुझे तरस आता है। क्या पता बच्चे के मरने के बाद आपको पता चले वो वास्तव में एक लड़का था और गलत रिपोर्ट के चक्कर में आपने अपना बेटा खो दिया। नामुमकिन तो नहीं लगता खासकर तब जब जब कागज़ पे लिखी रिपोर्टों में भी गलतियाँ मिलना आम है।
आप जानते हैं हमारे बिहार में इस पाप में सबसे आगे कौन है? हम। सीतामढ़ी वासी। पूरे राज्य में सबसे ज्यादा बेटियां सीतामढ़ी में ही मारी जाती हैं। अब शायद आप मेरी सीतामढ़ी के डॉक्टरों से नाराजगी समझ गए होंगे। जी हाँ माता सीता की जन्म भूमि पर ये घिनौना अपराध हो रहा है और हम सब मूक दर्शक बने हैं। ऐसा नहीं है की किसी को कुछ पता नही है। सबको पता है , दबे जुबान बातें भी होती हैं पर जब तक किसी को कुछ गलत न लगे कोई आवाज़ नही उठाएगा। किस विडम्बना है की हमारी तरह उत्तर प्रदेश में भी यही हाल है। वहां भी सबसे आगे राधा की जन्म भूमि मथुरा ही है। एक आलेख के मुताबिक़ सीतामढ़ी में लिंग अनुपात १००० लड़कों पर केवल ८६९ लड़कियां है। तो दहेज़ के सपने देखने वालों पर मुझे हंसी आ रही है। मथुरा में यही अनुपात १०००/७९० है।
मोदी जी ने हमें नारा दिया, “बेटी बचाओ ,बेटी पढाओ”। आप मुझे ये बताएं की बेटी को किस से बचाना है? उसके माँ बाप से या डॉक्टरों से? दोनों तो भगवान् के बराबर ही हैं। फिर उनसे कैसा खतरा? आखिर क्या ज़रूरत पड़ी इस अभियान की भारत जैसे परम्परावादी ,संस्कारी ,सहिष्णु देश में? क्यूंकि यायाथ्वादी युग में न भावनाओं का कोई मोल है न इंसानियत का। एक दुर्भाग्यपूर्ण खबर ये भी पढ़ी की जिस बेटी ने नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में ‘बेटी बचाओ’ मुद्दे पर भाषण दिया था उसने दंबगों की छेड़छाड़ और धमकी से परेशान होकर खुदकुशी कर ली।
लिंग अनुपात के बारे में तो आप सभी जानते ही होंगे। कितने कुंवारे इंतज़ार में बैठे होंगे ये भी आपको पता ही होगा। सबको बेटे ही पैदा करने थे बहु तो किसी ने पैदा ही नहीं की। भविष्य की कल्पना आप कर ही सकते हैं की प्रजानन प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी और इंसानों का नामोनिशान मिट जायेगा।
इसका क्या उपाय हैं? हालत सिर्फ नियम और कानून के सख्त पालन से नहीं बदलेंगे। सिर्फ मेडिकल टीम पर नियम लागू करने से नहीं बदलेंगे। कई बार लोग आर्थिक तंगी का रोना रो कर भी बेटी को गिराने के लिए डॉक्टरों के ऊपर दबाव बनाते हैं। ऐसे में सबसे जरुरी लोगों की सोच बदलना है। उस नन्ही की जान को बोझ समझाने वालों को समझाना है की वो बोझ नही उम्मीद की एक किरण है । खुशियों की एक आहट है। सपनो की एक चाभी है।आपके सरदर्द की दवा है। आपके भविष्य की एक पूँजी है।

उन सभी अजन्मी बेटियों को समर्पित !

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