सीतामढ़ी के निकम्मे नेता।

नमस्कार मित्रों, नेताओं का मौसम बिहार में तकरीबन समाप्त हो चूका है, आने वाले चंद महीनो में न तो चुनाव है और ना नेताओं के मशक्कत करने की जरुरत। इसलिए बिन मौसम नज़र नही आते हैं, आजकल यही स्थिति है।
सीतामढ़ी परिवार के माध्यम से मैं सीतामढ़ी के सभी जन प्रतिनिधियों से एक सवाल करना चाहता हूँ, क्या स्कार्पियो पर पांच दस चमचों के साथ आगे पीछे बौआने, पटना से सीतामढ़ी का चक्कर लगाने, चार आदमी के यहाँ भोज का न्योता पूरने के अलावा भी आपकी कोई जिम्मेवारी है?

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सड़क की सच्चाई।
Ram kumar sharma MP
राम कुमार शर्मा, सांसद।

सांसद महोदय से 2014 से ही उम्मीद करना बंद कर चुके हैं, लेकिन जनके अलावा जो 7 महारथी विधायक हैं उनसे यही उम्मीद करून? सांसद महोदय 2 साल में अपने फण्ड का आधा पैसा भी इस्तेमाल नही कर पाये।

सुनील कुशवाहा, सीतामढ़ी विधायक।
सुनील कुशवाहा, सीतामढ़ी विधायक।

सीतामढ़ी के लोगों की मांग तक पता नही है इन सब को। अपनी गाडी में अच्छे शॉकर लगे हुए हैं, बाकी लगमा से सीतामढ़ी जनता कैसे कूद कूद के जायेगी इसका कोई परवाह नही है। मान लीजिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्रवर्तित हो गया, तो पुराने सड़क की जिम्मेवारी किसकी है? क्या वह सड़क अब राज्य सरकार की अमानत नही है? क्या उसके आसपास बसे हुए लोग अच्छे सड़क के सपने को छोड़ दें? बताइये किस नेता ने आज तक विचार किया इसपे? किसी ने नही, क्योंकि फुर्सत नही है और दर्द महसूस तो होता ही नही है।

 

आज़ादी के 70 वर्ष पर मोदी जी को बात दीजिये की सीतामढ़ी में अभी 23 गाँव में बिजली नही आयी है। अपने दावों का अचार बना के खा लें। कुछ होने वाला नही है।

आन दिन सड़क पर रोड पर करने के चक्कर में सीतामढ़ी के लोग मर रहे हैं, किसी ने आजतक पैदल पर पूल की मांग नही की । राष्ट्रीय राजमार्ग है, लोगों को स्वतंत्रतता है गाड़ी को रफ़्तार में चलाने की।

एक और अंदर की बात बताता हूँ, सीतामढ़ी के नेताओं को सुझाव चुभता है। सुझाव मान लेना तो दूर की बात, तुरंत काट देंगे। खुद कुछ  काम का पता हो या न हो, लेकिन विचार सिर्फ अपना चलना चाहिए। ऐसे नेताओं के वजह से ही आज मजबूरन देश से 20 साल पीछे जीने को मजबूर हैं हम और आप।

सीतामढ़ी में सरकारी और प्राइवेट बस स्टैंड से सब अवगत हैं, लेकिन कोई नेता आजतक अच्छे बस स्टैंड की मांग तक नही कर पाये। बाकायदे अपने 28 साल की जिंदगी में मैंने 5 बार सुना की नया बस स्टैंड कभी शांतिनगर में होगा, कभी पोखरपुर में, कभी लगमा में, भोली जनता सुनती है, एक दो साल उसी ख़ुशी में निकाल देती है, फिर एक नए जगह का प्रस्ताव आ जाता है, फिर से नए जगह को लेकर खुश हो जाते हैं। ख़बरों का सिलसिला चलता रहता है, फर्क नही पड़ता है।

श्री माता वैष्णो वैष्णो देवी मंदिर को पंडितों के चुंगल से वहां के तत्कालीन राज्यपाल जगमोहन ने आर्मी के विशेष आपरेशन में छुड़ा लिया था और स्थापना बोर्ड के हवाले कर दिया था। यहाँ पुनौरा धाम हो या जानकी मंदिर, लोग हथिया के बैठे हुए हैं और नेताओं का बकार निकलता है किसी के दबंगई के सामने। कोई हाथ लगाना ही नही चाहता। किसी को नही पड़ी है कि सीतामढ़ी विश्व मानचित्र में पर्यटन का केंद्र बने। नाम नही लेना चाहता , मगर एक पूर्व मंत्री थे पर्यटन के , कुछ नही हिला पाये। यथास्थिति बरकार है। अगर श्री माता वैष्णोदेवी स्थापना बोर्ड का गठन हो सकता है तो माँ जानकी स्थापना बोर्ड का गठन क्यों नही हो सकता?

मुजफ्फरपुर से पाटलिपुत्रा तक ट्रेन गयी मगर सीतामढ़ी तक नही जा पायी, जानते हैं क्यों? कोढ़िया सब के कारण। समझ रहे हैं न?

विश्व में नहर से अच्छा साधन कृषि के लिए कुछ भी नही है। अब याद कर लीजिए नहर की हालत। एक अद्भुत नहर जिसके बिच से सड़क गुजरती हो बिना पूल के। दोनों तरफ कब्जे की दूकान, नहर भर भर के घर बन गया, नेता और प्रशाशन को घंटा असर पड़ता है? खेती तो बोरिंग से भी जायेगा, नहर तो गैर मजरुआ ज़मीन है, सबके बाप की जागीर। कौन खाली करवा लेगा? किसकी मज़ाल?

सीतामढ़ी ऐसा शहर है जिसके पास कोई मास्टर प्लान नही है, सब हवाबाजी में चल रहा है। कहाँ शौच का पानी जाएगा, गंदे पानी को साफ़ करके नदी में कैसे गिराया जाए, कोई प्लान नही है। और रहेगा भी कैसे , मतलब ही नही है। मेरे गली का नाला रोड पर खत्म होता है , जो मेरे गली के सड़क से ऊंचाई पर है।

मैंने इनसे उम्मीद छोड़ दी है, आपसे नही। आपमें शक्ति है, ताकत है।  अपनी मांगे के लिए जिस दिन आप उठ गए, उस दिन सीतामढ़ी बदल जाएगा। लेकिन आप भी व्यस्त हैं अपने कार्यक्रम में, अपने धंधे में, अपनी नौकरी में , अपने परिवार में। क्या कर सकते हैं, कौन लेगा नेता से पंगा, सीतामढ़ी का कुछ नही हो सकता, ऐसे सोच लेकर आप भी परदे के पीछे के अपराधी हैं। उठिये, जागिये, नही तो अगली पीढ़ी के सवालों का जवाब देना भाड़ी पड़ जाएगा।

9 thoughts on “सीतामढ़ी के निकम्मे नेता।

    1. धन्यवाद कुँवर साहब। आप लोगों का सहयोग औऱ समर्थन से ही हिम्मत होती है आवाज़ उठाने की।

  1. नेताओ को गाली देने मात्र से काम नहीं चलेगा । जनता को अपने हक़ की लड़ाई लड़नी पड़ेगी । और नेताओं को एक एक रुपया का हिसाब देना पड़ेगा।

    1. धन्यवाद रितु जी। मैं भी सिर्फ गालियां देने में भरोषा नही रखता। लोगों को जागरूक बनाना है, संभावनाएं तलासनी है। मैंने इस लेख के माध्यम से नेताओं को एक टारगेट दिया है, वो हमारे प्रतिनिधि है, उम्मीद है कि कुछ काम हो जाए। आप भी नेत्री हैं, आप काम कर रही हैं और सैकड़ों मुखिया ऐसे हैं जो बस हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

  2. सीतामढ़ी… एक ऐसा शहर जो खुद ये नही जानता की मईया सीता पुनौरा में जन्मी या जानकी मंदिर में ।। तो लोगो से और सरकार से कैसे उम्मीद करूँ की यहाँ विश्व विख्यात मंदिर बनाये जाये और पर्यटन को बढ़ावा दिया जाये । अब बात मुद्दों की…

    जिस नेता को देख हम सब सोचते हैं की ये कोई काम का नही उसी का दूसरा नाम “जनप्रतिनिधि” है, जो हमने आपने और हम सब ने भाड़ी बहुमत से मतदान कर के विजय बनाया है ।। बेकार है उन्हें कुछ भी केहना, क्योंकि वो भी वही कर रहा है जो उसे चुनने से पहले हमारे ही बिच के लोगो ने किया है, पैसा लिया हर एक वोट के लिए, दारु बहाया हर एक वोट के लिए.. तो फिर वह भी क्यों ना अपना बहाया हुआ पैसा बटोरे, और अगले चुनाव में बहाने वाला पैसा बनाये ।। आरे उसे क्या फर्क पड़ता है जनाब की सीतामढ़ी में कितने गढ़े हैं, उन्हें ये बेसक पता है की सीतामढ़ी में कितने गदहे हैं ।।

    गदहे ही तो हैं जो बस जीये जा रहे हैं अपनी ज़िन्दगी बिना सोचे हुए की आखिर ये हो क्या रहा है ।।

  3. I agree with you but with some additions. I never know other leader of the adjacent districts is much dashing as some ours. In my thinking the main problem is in inhabitants of Sitamarhi districts. They never agitate ,they adjust calmly with their difficulties. Many of us remember the road of muzaffarpur sitamarhi in rainy season .the minimum supply of electricity, the poor infrastructure of transmission, lower funds for agricultural subsidies, and agricultural disaster’s. Any type of unified public demands. We wait till last for a miracles.
    Why it is so.how we are different from darbhanga samstipur motihari.Muzaffarpur is centrally located all the development have to go through it.
    I think Sitamarhi districts is economically rich,in agriculture, business transection, having big land lords previously (6 in the district) its negative effect. We know the peoples dealing unitedly with the problems in darbhanga like electricity supply and got quicker results.
    Leaders got the power from his followers powerful peoples make the power full leaders.THANKS .YOUR, MD KHALID ALI KHAN.EX ZILAPARSHAD

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