ये हैं सीतामढ़ी के 40 दर्शनीय स्थल ।

(रंजीत पूर्बे) : एक विशेष आलेख : सीतामढ़ी के सभी दर्शनीय और पर्यटन स्थलों पर ।

जगत जननी माँ जानकी जन्मभूमि सीतामढ़ी एक पवित्र और दर्शनीय स्थल है । सीतामढ़ी में सर्वप्रमुख दो जानकी मंदिर है जो पर्यटकों के लिये मुख्य आकर्षण स्थल है । इसके अलावे और भी बहुत कुछ हैं सीतामढ़ी में जहाँ घूमा जा सकता है । आइये एक विस्तृत नजर डालते हैं :

(आर्टिकल के लास्ट में , नीचे एक वीडियो है , जिसमें सभी दर्शनीय स्थल दिखाया गया है )

1) जानकी उदभव प्रतिमा : मिथिलांचल नरेश श्री जनक द्वारा हल चलाने से माँ जानकी का जन्म हुआ । इसी को एक चित्र के माध्यम से उकेरे हैं सीतामढ़ी के प्रसिद्ध शिल्पकार श्री फणीभूषण विश्वास जी । फणीभूषण जी द्वारा तराशी गई इसी सुंदर प्रतिमा को एक बड़ी-सी झाँकी के रूप में सीतामढ़ी स्टेशन परिसर में स्थापित किया गया है । मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार द्वारा इस प्रतिमा का अनावरण सितम्बर 2013 में सीतामढ़ी में किया गया । आज यह प्रतिमा सीतामढ़ी की पहचान बन चुकी है ।

2) जानकी मंदिर, पुनौरा : सीतामढ़ी शहर से 2 km दूर पुनौरा में बहुत ही भव्य जानकी मंदिर है । प्राचीन काल में यहाँ पुण्डरीक ऋषि का आश्रम था । मान्यता है कि यहाँ स्थित जानकी कुण्ड में ही माता सीता का जन्म हुआ । यहाँ एक पर्यटन भवन, गायत्री मंदिर, विवाह मंडप, सुन्दर पार्क तथा म्यूजिकल फाउंटेन झरना एवं फव्वारा भी है । पुनौरा सीतामढ़ी का फेवरेट पिकनिक स्पॉट भी है । यहाँ कई फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है । प्रत्येक वर्ष “सीतामढ़ी महोत्सव” नामक दो दिवसीय भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी पुनौरा धाम में ही होता है ।

3) जानकी मंदिर, जानकी स्थान : सीतामढ़ी शहर के जानकी स्थान स्थित सैकडों वर्ष पुराने इस भव्य मंदिर का मुख्य द्वार चाँदी से निर्मित होने के कारन इसे रजत द्वार मंदिर भी कहते हैं ।
एक ही बहुमूल्य काले पत्थर से निर्मित माँ सीता और भगवान श्री राम की अदभुत प्रतिमा भक्तों का ध्यान सहज ही अपनी ओर आकर्षित करती है । मंदिर परिसर में ही निर्मित उर्विजा कुण्ड भी बहुत ही भव्य व सुन्दर है जिसके मध्य में हल चलाते राजा जनक और घड़े से प्रकट होती माँ सीता की प्रतिमा है ।

4) जानकी मंदिर, जनकपुर धाम, नेपाल : सीतामढ़ी से 50 km दूर नेपाल में स्थित जनकपुर में बहुत ही खूबसूरत जानकी मंदिर है । सीतामढ़ी धाम और जनकपुर धाम में बहुत ही पवित्र और गहरा रिश्ता है । प्राचीन काल में राजा जनक के राज्य मिथिलांचल की राजधानी थी जनकपुर । और तब सीतामढ़ी भी मिथिलांचल राज्य का ही अंग हुआ करता था । माँ सीता का जन्म सीतामढ़ी,बिहार में हुआ और जन्म के पश्चात उन्हें जनकपुर के नौलखा मंदिर में लाया गया ।

5) हलेश्वर स्थान : सीतामढ़ी से 5 km दूर बैरिया गिरमिसानी गाँव में राजा जनक ने मिथिला राज्य को भयंकर अकाल से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से शिवलिंग की स्थापना कर हलेष्ठि यज्ञ किया था । इसीलिए यहाँ स्थापित मंदिर को हलेश्वर नाथ महादेव भी कहा जाता है । पुरातन प्रसिद्ध होने के कारण यहाँ हमेशा श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। यहाँ रविवार सहित प्रत्येक वसंत पंचमी,शिवरात्रि एवम श्रावण सोमवारी को विशाल मेला लगता है ।

6) बगही मठ : डुमरा ब्लॉक के रंजीतपुर में स्थित बगही धाम एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है । 108 कमरों से युक्त इस मठ में 24 घंटा कीर्तन और सीता-राम नाम जाप होता रहता है ।
Feb’ 2017 में (17-27 फरवरी) यहाँ बहुत ही बड़े स्तर पर भव्य रूप में ”श्री सीताराम नाम जाप महायज्ञ” का आयोजन हुआ ।इस मठ परिसर में ही बाबा धनेश्वरनाथ महादेव का एक सुन्दर और भव्य मंदिर भी है ।यहाँ प्रसिद्ध संत बगही बाबा तपस्वी नारायण दास जी महाराज की समाधि स्थल भी है । उन्हीं के जन्म के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में फरवरी, 2017 में सीताराम नाम जाप महायज्ञ का आयोजन हुआ । बहुत बड़े स्तर पर भव्य ‘मेला’ भी लगा । बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार, कई केंद्रीय मंत्री भी इस यज्ञ के दौरान बगही धाम पधारे थे । बगही मठ के प्रमुख वर्तमान संत श्री सुकदेव दास जी महराज और रामाज्ञा दास जी महराज जी हैं । इस पूरे आयोजन का ‘लाईव’ प्रसारण टेलीविज़न चैनल और इस ‘सीतामढ़ी फेसबुक पेज’ पर किया गया ।

7) पंथपाकड़ : बथनाहा प्रखण्ड में स्थित पंथपाकर का व्यापक पौराणिक और अध्यात्मिक महत्व है .पंथपाकड़ की चर्चा बाल्मीकि रामायण में भी अंकित है । मान्यता है कि त्रेतायुग में माँ जानकी की डोली विवाह के बाद जब जनकपुर से विदा हुई तो विश्राम के लिए यहीं इसी स्थान पर विशाल पाकड़ के पेड़ के नीचे माँ सीता की डोली रखी गयी । उसी समय से इस स्थल का नाम पंथपाकड़ पड़ा । यहीं पर मां सीता ने विश्राम किया और इस स्थान से एक पाकड़ की पेड़ के डाली को तोड़ कर दातुन की । दातुन के चीरा पास में ही फेक दिया गया जिसका नतीजा हुआ कि इस स्थल पर जगह जगह पाकड़ का पेड़ उग आया .माँ जानकी की डोली स्थल पंथपाकड़ में लोग दूर दराज से दर्शन के लिए आते हैं । सच्चे मन से मन्नते मांगने मांगने पर उनकी मुरादे पूरी होती है .
इस पवित्र स्थान के बारे में विद्वानों की माने तो बाल्मीकि रामायण में वर्णित राम -परशुराम का संवाद भी पंथपाकड़ में ही हुआ था । परशुराम ने राम को अयोध्या जाने का रास्ता यहीं से दिखाया था।
यहाँ के पाकड़ के पेड़ों की दो दर्जन से अधिक शाखायें हैं और इस परिसर में एक प्राचीनतम कुण्ड भी है । माँ सीता ने उस कुण्ड के पानी का उपयोग किया था । आज सीतामढ़ी का पंथपाकड़ पर्यटकों औरश्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है ।

8) दमामी मठ, बेलसंड : बेलसंड के दमामी गाँव मे अति प्राचीन बाबा ईशाननाथ का शिव मंदिर है ।दमामी मठ के शिवलिंग के दर्शन हेतु शिवरात्रि,वसंत पंचमी एवम श्रावण महीना के समय भक्तों का हुजूम उमड़ता है । मान्यता है यहाँ दर्शन और जलाभिषेक करने से भोले बाबा सारी मन्नतें पूरी करते हैं । बरसात के समय दमामी मठ का शिवलिंग जलमग्न रहता है । विशेष आकर्षण के रूप में यहाँ एक प्राचीन घण्टा भी है । कहा जाता है यह घंटा मिथिला नरेश राजा जनक द्वारा 1200 ई. के आस पास स्थापित किया गया था ।

9) देकुली धाम, शिवहर : वर्तमान शिवहर जिला 1994 में सीतामढ़ी जिला से ही कट कर बना है । देकुली धाम शिवहर की पहचान और ऐतिहासिक धरोहर है । यहाँ सत्युगकालीन बाबा भुवनेश्वर नाथ महादेव का अति प्राचीन शिव मंदिर है । इसका वर्णन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey Of India) के प्रतिवेदन में विस्तार से किया गया है 1907 और 1957 ई. के मुजफ्फरपुर जिला गजेटियर में भी देकुली का उल्लेख मिलता है । यहाँ रविवार, सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और भोले बाबा के दर्शन को आते हैं । श्रावण महीना में और शिवरात्रि के समय तथा अन्य अवसर पर बड़ा मेला भी लगता है । यहाँ आये दिन शादी विवाह, जेनउ, मुंडन जैसे अन्य मांगलिक कार्य भी सम्पन्न होते हैं । देकुली धाम के बाबा भुवनेश्वर नाथ महादेव के दर्शन हेतु शिवहर के अलावा पड़ोसी जिला सीतामढ़ी,मोतिहारी,मुजफ्फरपुर और पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं ।

10) मढिया मठ : सोनबरसा ब्लॉक में भुतही से चार-पांच किमी दूर मढ़िया ग्राम में स्थित यह भव्य शिव मंदिर सीतामढ़ी का एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है.
यहाँ भोले बाबा का प्राचीन शिवलिंग आस्था का केंद्र हैमान्यता है यहाँ रविवार को जलाभिषेक करने से भोला बाबा सारी मन्नतें पूरी करते हैं ।यहाँ प्रत्येक रविवार को एक बहुत बड़ा मेला भी लगता है । उस दिन नेपाल और सीतामढ़ी के अलावे दूसरे जिला से भी भोला बाबा के दर्शन और जल चढाने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता है ।
प्रत्येक साल श्रावण महीना में नेपाल तथा दूर दूर से लोग काँवर ले के भी आते हैं । बैगन का भार (भंटा का भार) चढाने की भी प्रथा है । मार्च महीना में भी, होली के समय, एक महीना का भव्य मेला लगता है ।
मढ़िया मेला में बिकने वाला फर्नीचर का सामान और तेजपत्ता, गर्मागर्म जलेबी और बालूशाही बहुत प्रसिद्ध है ।घुरघुरा-हनुमान नगर गाँव और मधेसरा गाँव के नजदीक स्थित मढ़िया गाँव के इस भोले बाबा के मानकेश्वर नाथ मंदिर का दर्शन एक बार जरूर कीजिये ।

11) अन्हारी मठ : रीगा प्रखंड के अन्हारी गाँव में स्थापित है बाबा अदभुत नाथ महादेव का अदभुत शिवलिंग ।अन्हारी शिवालय को सिद्धि व तप का स्थल माना जाता है। इन्हें भूतनाथ, अदभुत नाथ और अन्हारी महादेव के नाम से जाना जाता है । यहाँ श्रावण महीना,शिवरात्रि और वसंत पंचमी के समय श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ उमड़ती है ।मान्यता है अन्हारी महादेव पर जलाभिषेक करने से सारी मन्नतें पूरी होती हैं । कुष्ठ और असाध्य रोग से पीड़ित व्यक्ति भी बाबा की कृपा से बिल्कुल ठीक हो गए हैं ।
कहा जाता है अन्हारी मठ के इस अदभुत शिवलिंग की उत्पति आकाश से हुई । शिवलिंग दो टुकड़ों में दो अलग अलग स्थान पर गिरा था । आकाशवाणी के बाद दोनों टुकड़ों को एक जगह रखा गया,तो जुट गए। यहीं से शुरू हुई थी श्रद्धा व भक्ति जो आज तक बरक़रार है ।

12) पुपरी का बाबा नागेश्वर नाथ मंदिर : सीतामढ़ी शहर से 25 किमी दूर पुपरी शहर में नेपाली शैली में बना यह अति प्राचीन मंदिर है । यहाँ सैकडों वर्ष पूर्व महादेव स्वयं शिवलिंग के रूप में धरती से उत्पन्न हुए थे । मान्यता है यहाँ जलाभिषेक करने वाले को संतान की प्राप्ति होती है । भोलेनाथ के दर्शन मात्र से कुष्ठ व असाध्य रोग पीड़ित व्यक्ति भी ठीक हो गए हैं ।
यहाँ श्रावण महीना, महाशिवरात्रि और वसंत पंचमी के समय श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ उमड़ती है । प्रत्येक रविवार को मेला का भी आयोजन होता है । पुपरी कायह बाबा नागेश्वर मंदिर आसपास एवं नेपाल के लोगो के लिए आस्था-उपासना का एक बड़ा केंद्र है ।

13) हनुमान मंदिर, महावीर स्थान, सोनापट्टी : सीतामढ़ी शहर के कोट बाज़ार में दक्षिण मुखी संकट मोचन हनुमान मंदिर स्थापित है। मूर्ति की स्थापना 1860 में हुई थी । धार्मिक दृष्टिकोण से मन्दिर का काफी महत्व है। जनश्रुति है कि अयोध्या के एक संत को रात में हनुमान जी ने स्वप्न में दर्शन देते हुए कहा कि सीतामढ़ी के एक संत अयोध्या आये हुए हैं । उनकी मूर्ति को माँ सीता की जन्मभूमि में स्थापित करने के लिए मूर्ति को सीतामढ़ी के संत को दे दो । हनुमान जी के आदेश को मानते हुए अयोध्या के संत ने सीतामढ़ी के महात्मा बलदेव शर्मा को मूर्ति दे दी। श्री शर्मा ने मूर्ति को लाकर सीतामढ़ी में स्थापित किया । मन्दिर की ख्याति दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही गयी । मान्यता है मंदिर में बैठकर राम नाम जाप, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड के पाठ करने से सभी मनोकामनाए पूर्ण होती हैं। मंगलवार और शनिवार को सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु दर्शन को मन्दिर में आते हैं ।

14) श्री सुकेश्वर नाथ मंदिर : मेजरगंज के बसबिट्टा में स्थित है श्री शुकेश्वर नाथ मंदिर । मान्यता है व्यास पुत्र शुकदेव ने यहीं बागमती नदी के किनारे भगवान शंकर की पूजा-अर्चना कि थी और महादेव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए । धार्मिक तिथियों पर यहाँ श्रद्धालुओं की काफी भीड़ लगी रहती है । यहाँ पड़ोसी देश नेपाल से भी काफी संख्या में श्रद्धालु आते हैं ।

15) श्री माता वैष्णो देवी मंदिर : सीतामढ़ी शहर में महन्थ साह चौक के निकट माता मंदिर मार्ग में बहुत ही भव्य और सुंदर श्री माता वैष्णो देवी मंदिर है । यहाँ श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है । विशेष कर नवरात्र में दुर्गापूजा के समय माता के दरबार को और भी भव्य और सुंदर ढंग से साजया जाता है ।

16) रानी मन्दिर, सुरसंड : कई ऐतिहासिक पहलुओं को अपने में समेटे स्वर्ण मंदिर के नाम से विख्यात सुरसंड के रानी मन्दिर को देख कर ताज महल की याद ताजा हो जाती है। इस मंदिर को रामायण काल का माना जाता है । सन 1759 ई में तकरीबन ढाई सौ वर्ष पूर्व महारानी राजवंशी कुंवर ने पांच स्वर्ण युक्त गुम्बद वाले 70 फ़ीट ऊंचे मन्दिर का निर्माण कराया। यहाँ राम जानकी समेत कई देवी देवताओं की दुर्लभ मूर्ति स्थापित की गई थी। करीब दो एकड़ में निर्मित रानी मन्दिर की बनावट ताजमहल जैसी दिखती है। कहा जाता है शाहजहाँ की तरह ही रानी राजवंशी कुंवर ने भी मंदिर निर्माण करनेवाले चार मजदूर के हाथ काट लिए थे, ताकि मन्दिर की नकल करके दूसरे मन्दिर का निर्माण न हो सके ।

17) अमनेश्वर नाथ महादेव मंदिर,सुरसंड : सुरसंड के अमाना गाँव के जंगल में स्थित रामायणकालीन अमनेश्वर नाथ महादेव मंदिर में 45 फ़ीट की भव्य और आकर्षक हनुमान जी प्रतिमा भी स्थापित है, जो पूरे इलाके में आकर्षण का केंद्र है । मन्दिर की ख्याति दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। यहाँ प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन को आते हैं । प्रतिमा का निर्माण समाजसेवी विजय शाही ने अपने निजी कोष से किया ।

18) बाबा गोविंद गणिनाथ मन्दिर : सीतामढ़ी शहर के बाईपास रोड स्थित पलवैया धाम में स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण और श्रद्धा का एक बड़ा केंद्र है ।

19 ) मां भगवती स्थल : श्रीखण्डी भिट्ठा : भिट्ठामोड स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र है । नवरात्र के समय यहां यहां विशेष रौनक होती है ।

20) डुमरा : सीतामढ़ी जिला का मुख्यालय : सीतामढ़ी शहर से 5 किमी दूर डुमरा है । डुमरा में ही सीतामढ़ी के समाहरणालय, जिला व्यवहार न्यायालय एवम सभी प्रशासनिक कार्यलय एवं डीएम, एसपी समेत सभी प्रशानिक अधिकारियों के निवास भी हैं । जानकी स्टेडियम, जो कि जिला का सबसे बड़ा फील्ड भी है, डुमरा में ही शंकर चौक पर है । डुमरा में शंकर चौक स्थित माँ काली मंदिर, श्री सत्य साईं मन्दिर एवम कैलाशपुरी के चंडीधाम का काली मंदिर भी आकर्षण के केंद्र है । डुमरा के कुमार चौक स्थित ”गीता भवन” बापू के संदेशों का साक्षी रहा है । यहाँ एक धार्मिक पुस्तकालय भी है । यह केंद्र साहित्यकारों के लिए ज्ञान का खाजाना कहा जाता है । गीता भवन में योग प्रशिक्षण केंद्र भी है । डुमरा में एमपी हाई स्कूल, कमला गर्ल्स हाई स्कूल, साइंस कॉलेज,महिला कॉलेज सहित दर्जनों सरकारी और प्राइवेट शिक्षण संस्थान हैं । डुमरा का नेहरू भवन जिला का एक प्रमुख ऑडिटोरियम है ।सीतामढ़ी पुलिस लाइन और एसएसबी केंद्र भी डुमरा में ही है । डुमरा में ही सीतामढ़ी का पहला औरएकमात्र इंजीनीयरिंग कॉलेज ‘सीतामढ़ी इंस्टीटूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ निर्माणाधीन है ।

21) सैनिटेशन टेक्नोलॉजी पार्क, डुमरा :
सीतामढ़ी के डुमरा में स्थित यह पार्क उत्तर भारत का अपनी तरह का अकेला ऐसा पार्क है, जहाँ हर कोने में विभिन्न प्रकार के शौचालय ही शौचालय बने है । समाहरणालय के पास स्थित इस ”स्वच्छता प्रद्योगिकी पार्क” में 9 विभिन्न प्रकार के शौचालय निर्माण की तकनीक को मॉडल के साथ प्रदर्शित की गई है । यह पार्क स्वच्छ भारत अभियान को गति दे रहा है । आपको जानकर बेहद खुशी होगी कि सीतामढ़ी जिला जल्द ही ”खुले में शौच मुक्त” घोषित हो चुका है ।

22) सीता कुंज, नगर उद्यान : सीतामढ़ी शहर के हॉस्पिटल रोड स्थित यह पार्क काफी बड़ा और सुंदर है । पार्क में काफी संख्या में बड़े बड़े छायादार वृक्ष, और फूल के पौधे लगे हुए हैं । यहाँ बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के झूला और एक रॉकेट रूपी इमारत भी बना हुआ है । पार्क के बीचोबीच एक सुंदर फव्वारा है । पार्क के चारों ओर टहलने के लिए पगडण्डी पर सुंदर टाइल्स लगाया गया है । यहाँ रोज सुबह बच्चे, बड़े, बुजुर्ग पूरे परिवार के साथ मॉर्निंग वाकिंग के लिए आते हैं । नववर्ष के अवसर पर इस पार्क को विशेष रूप से साजया जाता है । इस समय यहां लोगों की भीड़ लगी रहती है ।

23) गौशाला : सीतामढ़ी शहर स्थित गौशाला की स्थापना वैशाली निवासी गौ भक्त पंडित श्री रामनुग्रह त्रिवेदी ने 1892 में किया था । जिसका मुख्य उद्देश्य गोवंश का संरक्षण करना था। गौशाला परिसर में एक सुंदर कृष्ण मंदिर है । यहाँ गोपाष्टमी के अवसर पर कृष्ण लीला और नाटकों का मंचन होता है । उल्लेखनीय है यहाँ 1974 में हास्य व्यंग्य कवि सम्मेलन का आयोजन काका हाथरसी द्वारा किया गया था । इसके बाद अक्सर साहित्य संवर्द्धन का कार्य यहाँ होता रहा है ।

24) सभा गाछी, ससौला : सुप्पी ब्लॉक के ससौला गाँव मे स्थित यह पवित्र स्थली जिला का ही नहीं, बल्कि मिथिलांचल सभ्यता की पहचान है । यहाँ मैथिल ब्राह्मण प्रत्येक वर्ष एकत्रित होकर शादी हेतु वार्ता करते हैं तथा शादियां तय हो जाने पर शादी करते हैं।
25) बौधायनसर : बाजपट्टी प्रखण्ड में स्थित बौधायनसर एक प्राचीन तालाब है । संस्कृत व्याकरण के ज्ञाता पाणिनि के गुरु बौधायन ने यहाँ पर कई काव्यों की रचना की थी । इस तालाब के किनारे पर हर्षकालीन महर्षि बौधायन की प्रतिमा स्थापित है। यहाँ पर संत देवराहा बाबा भी मुख्य शिष्य थे। यहाँ सन्त देवराहा बाबा द्वारा स्थापित एक मंदिर भी है जो आकर्षण का केंद्र है ।

26) परमानंदपुर : डुमरा प्रखण्ड का गांव परमानंदपुर हनुमान जी की भव्य प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है, जो आशीर्वाद मुद्रा में विराजमान है । जनश्रुति के अनुसार लगभग पांचवे दशक में यहाँ स्थित एक मठ में एक सिद्ध पुरुष ने, जिन्हें अलौकिक शक्तियां प्राप्त थीं, ने हनुमान मंदिर की स्थापना किया था जिसे कालांतर में श्री श्री 108 श्री पंगु बाबा के नाम से जाना गया ।वर्तमान में इस अलौकिक केंद्र पर प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को भक्तों की भारी भीड़ लगती है।

27) बूढ़ा पोखर, सुरसंड : सुरसंड राजा सूरसेन ने सात सौ वर्ष पूर्व सुरसंड में बूढ़ा पोखर की खुदाई कराई थी । बाद में रानी राजवंशी कुँवर ने पोखर की देखभाल की जिम्मेवारी ले ली थी । कहा जाता है पोखर कि खुदाई दैत्यों/पिशाचों ने की थी । इसी कारण इस पोखड़ को दैत्ययी पोखड़ भी कहा जाता है। पोखड़ के किनारे एन एच 104 से देखने पर यह पोखड़ समुद्र जैसा दिखता है। इस पोखड़ मे बहुत धूम धाम से छठ पूजा मनाया जाता है । वर्तमान में बिहार सरकार के अधिग्रहण में है यह पोखड़ जहां विभाग द्वारा मत्स्य पालन कराया जाता है । भविष्य में मोटरबोट आदि की व्यवस्था कर पर्यटन स्थल के रुप विकसित करने की भी योजना है ।

28) सनातन धर्म पुस्तकालय : सीतामढ़ी के महन्थ साह चौक पर 1960 के दशक में इस पुस्तकालय की स्थापना की गई । यहाँ बड़ी संख्या में दुर्लभ पुस्तकें उपलब्ध है । यहाँ सैकड़ो शहरवासी रोज सुभबशाम पहुंच कर ज्ञानार्जन कर रहे । हाल ही में इस पुस्तकालय को आधुनिक रूप दिया गया है ।

29) सूर्य मंदिर : शहर के रिंग बांध रोड पर लखनदेई नदी के किनारे स्थित इस सूर्य मंदिर की स्थापना 1980 के दशक में कई गयी । सूर्योपासना छठ महापर्व के समय इस मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं । अब यह सूर्य मंदिर जिले भर के लोगों के लिए आस्था का केंद्र बनता जा रहा है ।

30) बाबा बाल्मीकेश्वर स्थान मन्दिर : सुरसंड प्रखण्ड में भारत नेपाल सीमा पर स्थित बाल्मीकेश्वर स्थान के मंदिर में बड़ी संख्या में भारत और नेपाल दोनों जगह से श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए आते हैं। मिथिला नरेश राजा जनक की पुत्री सीता के विवाह में शामिल होने अयोध्या से आने वाले हजारों ऋषि मुनियों में महर्षि वाल्मीकि भी आये थे । उन्होंने ही यहाँ शिवलिंग की स्थापना की। यहाँ के शिवलिंग गाय के कान के आकार की है जो 15 फ़ीट धरती की गहराई में है । यह अपनी तरह का अकेला शिवलिंग हैं । कालांतर में यहाँ जोगी राज महाराज ने माता सती अनसूया के मंदिर का निर्माण कराया । इसके बाद माता पार्वती और लक्ष्मी नारायण मंदिर का भी निर्माण हुआ । ये सभी मन्दिर काफी भव्य और सुंदर है ।

31) शिव मंदिर, मनवठेडू : नानपुर में डोरपुर भोटुआ पंचायत से सटे दरभंगा-सीतामढ़ी सीमा पर मनवठेडू गाँव मे 2 सौ साल प्राचीन शिव मंदिर है। यहाँ नरक निवारण चतुर्दशी और मकर सक्रांति के दिन हज़ारों की संख्या में आकर श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। बड़ा मेला लगता है। मान्यता है पीपल के पेड़ की जड़ से अंकुरित शिवलिंग की उत्पति हुई थी।

32) चर्च, तलखापुर : डुमरा के तलखापुर गाँव मे एक सुंदर और भव्य गिरिजा घर (चर्च) है । यह ईसाई समुदाय के लोगों की आस्था का प्रतीक है ।

33) गुरहौल शरीफ : बोखडा प्रखण्ड में अवस्थित गुरहौल शरीफ मुस्लिम समुदाय के लोगों की आस्था का प्रतीक है । बिहारशरीफ और फुलवारीशरीफ के बाद इसे मुस्लिम का सर्वाधिक पवित्र स्थल माना जाता है । यहाँ दूर दूर से मुस्लिम समुदाय के लोग भारी संख्या में पहुंचते हैं ।

34) मियाँ साहेब का मज़ार (जनाब मोहम्मद फौजदार अली खां) : सोनबरसा प्रखण्ड के फतहपुर गाँव मे मियाँ साहेब का मज़ार है । साल में एक बार शबेबारात के दो दिन बाद यहाँ उर्स का मेला लगता है । दूर दराज से लोग यहाँ मन्नते माँगने आते हैं । उर्स के मौके पर यहाँ चादर पेश किया जाता है ।

35) पंडौल बुजुर्ग का मज़ार : नानपुर प्रखण्ड के पंडौल बुजुर्ग पंचायत में 150 वर्ष पुराना मज़ार है। दुर्गापूजा के दो दिन बाद इस मज़ार पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। हिन्दू मुस्लिम दोनों यहां मन्नते मांगते है चादर चढ़ाते हैं। यहाँ दो मज़ार है । पुराने मज़ार का निर्माण खाखी बाबा और नए मज़ार का निर्माण मो. जबाब कराए थे ।

36) बाबा ठाकुर मन्दिर : परिहार में स्थित बाबा ठाकुर मन्दिर और इसके बगल में स्थित लगभग 50 एकड़ में फैला तालाब आकर्षण का केंद्र है ।

37) लहुरिया शरीफ : परिहार के लहुरिया बस्ती में चार चार हज़रत आराम फरमा रहे हैं । उनमें से तीन हज़रत अपने मुल्क अफगानिस्तान से बिहार और नेपाल की सीमा पर आ गए थे। सैकड़ो वर्ष पूर्व यहां घना जंगल था । आबादी न के बराबर थी । तभी इस जंगल मे हज़रत ने अपना डेरा डाले । उनकी हिकमत और आस्था से शमा रौशन हुआ । आज यह इलाका घनी बस्ती में तब्दील हो चुका है। अब यह मुस्लिमो का सेंटर और पचमहला के नाम से जाना जाता है। हज़रत कमर कायल रजवी मुस्लिमो के रहनुमा माने जाते हैं । उनकी अनोखी मेहनत,इबादत और परहेजगारी की बड़ाई कूट कूट कर लोगों के दिल मे बसे हैं । तीनों हज़रत , हज़रत लाहौर पीर, हज़रत जलाल पीर, हज़रत मदार पीर के कब्र से महसूस करनेवालों ने आज भी नूर और खुशबू महसूस करते हैं।

38) मदरसा असरफुल उलूम और रजाउल उलूम,कन्हवां : भारत नेपाल सीमा पर स्थित कन्हवां गाँव मुस्लिम छात्रों के लिए शिक्षा का सेंटर माना जाता है । शिक्षा के क्षेत्र में ये दोनों मदरसा उत्तर बिहार में प्रथम स्थान रखता है । इन मदरसों में बाहर के भी हज़ारों छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं । असरफुल उलूम मदरसा को किले के रूप में बनाया गया है। बीच मे एक खूबसूरत मस्जिद है । रजाउल उलूम में भारत नेपाल के नामचीन शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं । यहाँ कंप्यूटर और अंग्रेजी माध्यम की भी शिक्षा दी जाती है ।

39) मदरसा रहमानिया, मेहसौल : यह उत्तर बिहार का प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान है । 1927 ई में हज़रत मौलाना अब्दुल अजीज साहब वसंती रहमतुल्ला अलैह ने इसकी स्थापना की । और इसके सबसे पहले शिक्षक के रूप में जनाब हाफिज मो. इस्माइल साहब रहमतुल्लाह अलैह ने शिक्षण का आधार रखा । आज यह शिक्ष संस्थान दिन प्रतिदिन कामयाबी की राह पर बढ़ रहा है । यहाँ शिक्षा के अलावा लड़कियों को लिए सिलाई,बुनाई,कढ़ाई आदि का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। रहमानिया कंप्यूटर सेंटर के माध्यम से छात्रों को कंप्यूटर शिक्षा भी दी जा रही है ।

40) चिल्ड्रेन पार्क : जानकी बाल उद्यान, डुमरा,सीतामढ़ी में हाल ही में एक और सुंदर और खूबसूरत पार्क बना है अपने सीतामढ़ी में डुमरा, शंकर चौक पर ,जानकी स्टेडियम के सामने इस नव निर्वित चिल्ड्रन पार्क का उदघाटन 24 अप्रैल को मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार किये हैं । 1 करोड़,28 लाख की लागत से यह जानकी बाल उद्यान निर्मित हुआ है ।

41) शॉपिंग मॉल एंड रेस्टुरेंट : मेट्रो सिटी जैसा शॉपिंग मॉल के लिहाज अभी सीतामढ़ी शुरुआती दौर में है । हाल के दिनों में सीतामढ़ी में कई बड़े बड़े शॉपिंग काम्प्लेक्स खुले है । डुमरा के बड़ी बाज़ार स्थित V2 वैल्यू एंड वैरायटी शॉप, डुमरा रोड में ही सर्किट हाउस के पास विशाल मेगा मार्ट और सीतामढ़ी शहर में नूतन सिनेमा के बगल में ‘एम बाजार’ आप घूम सकते हैं । नाश्ता खाना के लिए आप होटल सितायन, होटल शिव सुर्या,हनुमान मड़बारी वासा, आरएफसी रेस्टुरेंट,अनामिका रेस्टुरेंट,माखन स्वीट्स और कृष्णा स्वीट्स आदि का रुख कर सकते है । सीतामढ़ी शहर का मुख्य बाजार किरण चौक से मेन रोड, महन्थ साह चौक और सरावगी चौक होते जानकी स्थान तक । फिर महन्थ साह चौक से नूतन-शंकर सिनेमा हॉल होते बसूश्री सिनेमा तक । आप इसके इर्द गिर्द खरीदारी,घूमना फिरना कर सकते है । और सबसे सबसे प्रसिद्ध सीतामढ़ी का #बालूशाही मिठाई और नाश्ता में मुरही,घुघनी,प्याज का कचरी जरूर खाइये । स्वादिष्ट बालूशाही के लिए आप रुन्नी सैदपुर और भुतही गांव का रुख कर सकते हैं ।

लिंक क्लिक करके सभी दर्शनीय स्थल का वीडियो भी आप देख सकते सकते :

https://youtu.be/YRSQM8u7P9U

लाईक कीजिये सीतामढ़ी पेज http://facebook.com/Sitamarhi और जुड़े रहिये अपने शहर सीतामढ़ी से ।। किसी भी प्रकार की मदद या पूछताछ के लिए #सीतामढ़ी_फेसबुक_पेज से सम्पर्क कीजिये । (Ranjeet Purbey)

Thanks ! Sitamarhi Web Family

1 thought on “ये हैं सीतामढ़ी के 40 दर्शनीय स्थल ।

  1. Best Mythological ,Philosophical + Historical place of Indian Each Indian should come and see God Creation of Mithlanchal.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *