सीतामढ़ी में मेला “बचपन की यादें”

images (2)हमारे सीतामढ़ी में अलग अलग अवसर पर कई मेले लगते है।बच्चों में मेला को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह एवं रोमांच होता है।हम भी बचपन में मेला बहुत जाते थे और आप लोग भी जाते रहे होंगे। उन्हीं बचपन की यादों को मैंने इस कविता के माध्यम से ताज़ा करने की कोशिश की है…

हम भी अपने बचपन में
खूब मेला जाया करते थे
पापा से “पिफि” खरीदबाते थे
और दूरबीन भी लाया करते थे

आसपास लगने वालें
सभी मेलों का हमें पता रहता था
महीनों से उसके इंतज़ार में मैं
सिक्के जमा किया करता था

माँ तैयार कर देती थी हमें
नहाकर,तेल पाउडर लगा कर
पापा के बाइक की टंकी पर बैठकर
हम मेला जाते थे हॉर्न बजाकर

मेला में जाते ही सबसे पहले
हम वो खिलौने वाले के पास जाते थे
जो 2 रूपये लेकर दिल्ली का लाल किला
और आगरा का ताजमहल दिखाते थे

एक आँख बंद करके और
दूसरा आँख लेंस में घुसेड़ के
मुँह बिचका कर मजे से हम
खुश हो जाते थे रील देख के

लाल पिला वाला चश्मा
हमें बड़ा पसंद आता था
बिना 2-3 खरीदबाये पापा से
मैं कभी वापस नहीं जाता था

अगर कुछ पसंद आ जाता था
जो पापा नहीं खरीद देते थे
हम भी वहीं पर बैठ जाते थे
और आगे घुसुकबे नहीं करते थे

मुढ़ी,कचरी,फोफी और जिलेबी
हम थैला में भर कर लाते थे
रास्ते में दूरबीन से हम
इधर उधर ताकते हुए आते थे ।।।।

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