सूर्य नमस्कार….क्यों और कैसे?

सूर्य नमस्कार 12 शक्तिशाली योग आसनों का एक समन्वय है, जो एक उत्तम कार्डियो-वॅस्क्युलर व्यायाम भी है।

‘सूर्य नमस्कार’ का शाब्दिक अर्थ सूर्य को अर्पण या नमस्कार करना है। यह योग आसन शरीर को सही आकार देने और मन को शांत व स्वस्थ रखने का उत्तम तरीका है।

सूर्य नमस्कार प्रातःकाल खाली पेट करना उचित होता है। आइए अपने अच्छे स्वास्थ्य के लिए सूर्य नमस्कार के इस सरल और प्रभावी आसनों को आरंभ करें।

प्रत्येक सूर्य नमस्कार के चरण में 12 आसनों के दो क्रम होते हैं। 12 योग आसन सूर्य नमस्कार का एक क्रम पूर्ण करते हैं।सूर्य नमस्कार के एक चरण के दूसरे क्रम में योग आसनों का वो ही क्रम दोहराना होता है, अपितु केवल दाहिने पैर के स्थान पर बाएँ पैर का प्रयोग करना होगा (नीचे चौथे और नवें पद में इसका विवरण दिया गया है)।सूर्य नमस्कार के विभिन्न प्रारूप पाए जाते हैं, हालाँकि बेहतर यही है कि किसी एक ही प्रारूप का अनुसरण करें और उसी के नियमित अभ्यास से उत्तम परिणाम पाएँ।

सूर्य नमस्कार शुरू करने के कुछ ही समय के भीतर आप अपनी शारीरिक और मानसिक स्थिति में काफी अंतर पाएंगे.images (1)

एक नजर सूर्य नमस्कार के 10 फायदों पर…

1. आपका स्वास्थ्य निखरता है
सूर्य नमस्कार को डेली रूटीन में शामिल कर सही तरीके से किया जाए तो आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आएगी. 12 आसनों के दौरान गहरी सांस लेनी होती है जिससे शरीर को फायदा होता है.

2. बेहतर पाचन तंत्र
सूर्य नमस्कार के दौरान उदर के अंगों की स्ट्रेचिंग होती है जिससे पाचन तंत्र सुधरता है. जिन लोगों को कब्ज, अपच या पेट में जलन की शिकायत होती है, उन्हें हर सुबह खाली पेट सूर्य नमस्कार करना फायदेमंद होगा.

3. सूर्य नमस्कार करने से पेट कम होता है
आसनों से उदर की मांसपेशी मजबूत होती है. अगर इन्हें रेगुलर किया जाए, तो पेट की चर्बी कम होती है.

4. डिटॉक्स करने में मिलती है मदद
आसनों के दौरान सांस साँस खींचना और छोड़ने से फेंफड़े तक हवा पहुंचती है. इससे खून तक ऑक्सीजन पहुंचता है जिससे शरीर में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड और बाकी जहरीली गैस से छुटकारा मिलता है.

5. दूर रहेगी हर चिंता
सूर्य नमस्कार करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है और नर्वस सिस्टम शांत होता है जिससे आपकी चिंता दूर होती है. सूर्य नमस्कार से एंडोक्राइन ग्लैंड्स खासकर थॉयरायड ग्लैंड की क्रिया नॉर्मल होती है.

6. शरीर में लचीलापन आता है
सूर्य नमस्कार के आसन से पूरे शरीर का वर्कआउट होता है. इससे शरीर फ्लेक्सिबल होता है.

7. मासिक-धर्म रेगुलर होता है
अगर किसी महिला को अनियमित मासिक चक्र की शिकायत है, तो सूर्य नमस्कार के आसन करने से परेशानी दूर होगी. इन आसनों को रेगुलर करने से बच्चे के जन्म के दौरान भी दर्द कम होता है.

8. रीढ़ की हड्डी को मिलती है मजबूती
सूर्य नमस्कार के दौरान स्ट्रेचिंग से मांसपेशी और लीगामेंट के साथ रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और कमर लचीला होता है.

9. सूर्य नमस्कार से आप रहेंगे जवान
सूर्य नमस्कार करने से चेहरे पर झुर्रियां देर से आती हैं और स्किन में ग्लो आता है.

10 वजन कम करने में मदद
सूर्य नमस्कार करने आप जितनी तेजी से वजन कम कर सकते हैं, उतनी जल्दी डायटिंग से भी फायदा नहीं होता. अगर इसे तेजी से किया जाए तो ये आपका बढ़िया कार्डियोवस्कुलर वर्कआउट हो सकता है.

सूर्य नमस्कार कौन न करे…
– गर्भवती महिला तीसरे महीने के गर्भ के बाद से इसे करना बंद कर दें
– हर्निया और उच्च रक्ताचाप के मरीजों को सूर्य नमस्कार नहीं करने की सलाह दी जाती है
– पीठ दर्द की समस्या से ग्रस्त लोग सूर्य नमस्कार शुरू करने से पहले उचित सलाह जरूर लें
– महिलाएं पीरियड के दौरान सूर्य नमस्कार और अन्य आसन न करें

सूर्य नमस्कार कैसे करें

 

अपने आसन (मैट) के किनारे पर खड़े हो जाएँ, अपने दोनों पंजे एक साथ जोड़ कर रखें और पूरा वजन दोनों पैरों पर समान रूप से डालें। अपनी छाती फुलाएँ और कंधे ढीले रखें।

श्वास लेते हुए दोनों हाथ बगल से ऊपर उठाएँ और श्वास छोड़ते हुए हथेलियों को जोड़ते हुए छाती के सामने प्रणाम मुद्रा में ले आएँ ।

2
  • हस्तउत्थान आसन (रेज़्ड आर्म्स पोज़)

श्वास लेते हुए हाथों को ऊपर उठाएँ और पीछे ले जाएँ व बाजुओं की द्विशिर पेशियों (बाइसेप्स) को कानों के समीप रखें I इस आसन में पूरे शरीर को एड़ियों से लेकर हाथों की उंगलियों तक सभी अंगों को ऊपर की तरफ खींचने का प्रयास करें।

इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ?

अपने कूल्हे को आगे की तरफ धकेल कर यह सुनिश्चित करें कि आप अपनी उंगलियों के साथ ऊपर की ओर जा रहे हैं ना कि पीछे की तरफ मुड़ रहे हैं।

3
  • हस्तपाद आसन( हॅंड टू फुट पोज़)

 

श्वास छोड़ते हुए व रीढ़ की हड्डी सीधी रखते हुए कमर से आगे झुकें। पूरी तरह श्वास छोड़ते हुए दोनों हाथों को पंजो के समीप ज़मीन पर रखेंI

इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ?

हथेलियों को ज़मीन तक लाने में अगर ज़रूरत हो तो घुटने मोड़ सकते हैं, और अब घुटनों को सीधा करने का एक सौम्य प्रयास करें।

अब से लेकर जब तक सूर्य नमस्कार का यह क्रम पूरा नहीं हो जाता, अपने हाथों की इस स्थिति को इसी स्थान पर स्थिर रखें I

4
  • अश्व संचालन आसन (एक्वेस्ट्रियन पोज़)

श्वास लेते हुए जितना संभव हो दाहिना पैर पीछे ले जाएँ, दाहिने घुटने को ज़मीन पर रख सकते हैं, दृष्टि को ऊपर की ओर ले जाएँ I

इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ?

सुनिश्चित करें कि बायां पैर दोनों हथेलिओं के बीच में रहे।

5
  • डंडआसन (स्टिक पोज़)

 

 

श्वास लेते हुए बाएँ पैर को पीछे ले जाएँ और संपूर्ण शरीर को सीधी रेखा में रखें I

इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ?

अपने हाथ ज़मीन के लंबवत रखें I

6
  • अष्टांग नमस्कार (सल्यूट विथ एट पार्ट्स ऑर पायंट्स)

आराम से दोनों घुटने ज़मीन पर लाएँ और श्वास छोडें I अपने कूल्हों को पीछे उपर की ओर उठाएँ I पूरे शरीर को आगे की ओर खिसकाएँI अपनी छाती और ठुड्डी को ज़मीन से छुएँ I

अपने कुल्हों को थोड़ा उठा कर ही रखेंI अब दो हाथ, दो पैर, दो घुटने, छाती और ठुड्डी (शरीर के आठ अंग ) ज़मीन को छूते हुए होंगेI

7
  • भुजंग आसन (कोबरा पोज़)

आगे की ओर सरकते हुए, भुजंगासन में छाती को उठाएँI कुहनियाँ मुड़ी रह सकती हैं। कंधे कानों से दूर और दृष्टि ऊपर की ओर रखेंI

इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ?

श्वास लेते हुए छाती को आगे की तरफ धकेलने का सौम्य प्रयास करेंI श्वास छोड़ते हुए नाभि को सहजता से नीचे की ओर दबाएँI पैरों की उंगलियों को भी नीचे की तरफ दबाएँ। यह सुनिश्चित करें कि जितना कर सकते हैं उतना ही करें, अपने साथ ज़बरदस्ती ना करें।

8
  • पर्वत आसन (माउंटन पोज़)

श्वास छोड़ते हुए कूल्हों और रीढ़ की हड्डी के निचले भाग को ऊपर उठाएँ, छाती को नीचे झुकाकर एक उल्टे वी (˄) के आकार में आ जाएँI

इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ?

यदि संभव हो तो एड़ियों को ज़मीन पर ही रखें और रीढ़ के निचले भाग को ऊपर उठाने का प्रयास करेंI खिंचाव को गहराता हुआ अनुभव करें।

9
  • अश्वसंचालन आसन (एक्वेस्ट्रियन पोज़)

श्वास लेते हुए दाहिना पैर दोनों हाथों के बीच ले जाएँ, बाएँ घुटने को ज़मीन पर रख सकते हैंI दृष्टि ऊपर की ओर रखेंI

इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ?

दाहिने पंजे को दोनो हाथों के बीच में रखें और दाहिनी पिंडली को ज़मीन के लंबवत रखेंI कूल्हों को नीचे की तरफ ले जाने का प्रयास करें ताकि खिंचाव को गहराता हुआ अनुभव किया जा सकेI

10
  • हस्तपाद आसन ( हॅंड टू फुट पोज़)

श्वास छोड़ते हुए बाएँ पैर को आगे लाएँ, हथेलियों को ज़मीन पर ही रहने देंI अगर ज़रूरत हो तो घुटने मोड़ सकते हैं।

इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ?

धीरे से घुटनों को सीधा करें और अगर संभव हो तो अपनी नाक से घुटनों को छूने का प्रयास करें, और श्वास लेते रहेंI

11
  • हस्तउत्थान आसन (रेज़्ड आर्म्स पोज़)

श्वास लेते हुए रीढ़ की हड्डी को धीरे धीरे ऊपर लाएँ, हाथों को ऊपर और पीछे की ओर ले जाएँ, कुल्हों को आगे की तरफ धकेलें।

इस योग आसन को और प्रभावी कैसे बनाएँ?

सुनिश्चित करें कि कान बाजू से सटे हों और खिंचाव ऊपर की ओर हो, न कि पीछे की ओर।

12
  • ताड़ासन (ट्री पोज़)

श्वास छोड़ते हुए पहले शरीर सीधा करें फिर हाथों को नीचे लाएँI इस अवस्था में विश्राम करें और शरीर में हो रही संवेदनाओं के प्रति सजगता ले आएँ।

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