सोशल मीडिया

न जाने हम क्या थे और क्या हो गए

जो बसा ली है दुनियां,बस उसमें खो गए

वक्त ने बदल डाली अपनी चाल है

अब लोग फ़ेसबुक पे पूछते हैं

क्या आपका हाल है ?

सेना लड रही है  सीमा पर

जुबानी जंग ट्विटर पर सरेआम है

घर में माँ की कदर नहीं

” गौ माता ” को लेकर मचा कत्ले-आम  है

मानवता बिक रही कौड़ी में

धर्म   पे मचा कोहराम है

ऐ चाँद तू बता किसका है?

इस पेच में फसा इन्सटागराम है

भगवान की फोटो शेयर करने से

अच्छे दिन आते हैं

ऐसा कहने वाले कुछ लोग

व्हाट्स अप के बाबा कहलाते हैं

और  कुछ समझ ना आये तो उसकी

ठेकेदारी  गूगल विकिपीडिया ने संभाल ली है

ना जाने ऐसी कितनी जिम्मेदारी हमने

सोशल मीडिया पर डाल दी है

मिल जाती है अब हर चीज ऑनलाईन

.   जो हमारे नज़र को जँचता है

पर कोई तो बताए कि प्यार

किस साईट पर बिकता है

इन्सानियत कहा मिलती है

ऐतबार कहां मिलता है

कोई तो बताए कि ऐसा

संसार कहां मिलता है? ??????????

 

1 thought on “सोशल मीडिया

  1. आनलाइन बहुत रिश्ते होते
    आफलाईन नही कोई पहचान
    यह है फेसबूक मेरी जान।
    मानव मानव खूब लड़ाते
    ऐ है वाट्सअप वाले बाबा
    प्यार पाने की आशा न रखियो
    नेट यहाॅ फ्रि मिल जाएगे मेेरी जान

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