हमारा पहला KFC दौरा

दोस्तों KFC एक ऐसा शब्द है जिससे आज कोई नौजवान जो सीतामढ़ी से निकल कर पटना दिल्ली में रहता हो या कहीं भी बड़े शहर में शायद ही परिचित नहीं हो।मांसाहारी लोगों का तीर्थस्थल हो गया है आज के जुग में। हम भी पटना पहुँचे थे सीतामढ़ी से मैट्रिक पास कर के।और जो लईका मैट्रिक पास कर के पटना पहुँचता है जानते ही है कि उसको लगता है कि अब यहाँ कोन बोले वाला है।जे मन हुआ से किया। हम भी उसी में से थे।बहुत सुने kfc के बारे में।जो लोग दिल्ली रहते थे बताते थे कि बहुत बढ़िया चिकेन खिलता है।तो एक दिन हम भी सोंचे की काहे इ भी शौक़ बाकी रहेगा,आज इसको भी देखिये देते है।तो आइए आपको सीधे ले चलते है पटना के रीजेंट सिनेमा के नीचे KFC में लाइव।
हम टेंपू पकड़ कर नया टोला मछुआटोली से पहुँच गए गांधी मैदान।अकेले गए थे।हम सोंचे साला इतना भारी नामी होटल है किसी को कहेंगे चलने के लिये त साला कहेगा कि खिलायेगा त चलेंगे।इससे अच्छा अकेले जाने में फायदा है।
पहुँचे वहाँ जाम वाम से निपट के टेंपू का धुआँ लेते हुए।कात में एगो खाली टेबल देख के बैठ गए। हम सोंचे के आएगा कोनो पूछने की-सर क्या लीजियेगा।खाने का पूछने का बात त छोड़ ही दीजिये साला पानियों नही पिलाया एको गिलास।
10 मिनट से 20 मिनट हो गया।कोई नहीं आया। तब जा के हम सोचे अब खुदे कुछ करना पड़ेगा। एगो ललका टीशर्ट पहने भाई साहेब जिनके छाती पर kfc लिखा हुआ था उनसे कहे कि क्या सब है खाने वाला,मेनू तो दीजिये।तो वो उँगली से डायरेक्शन दे के उधर भेज दिया कह के की सर यहाँ सेल्फ सर्विस है। माने की आपको खाना खुदे वहाँ जा के आर्डर करना होगा और ले के आना पड़ेगा। हम सोंचे साला अइसे निमन त हमरा सीतामढ़ी के भारत-नेपाल है। जाइते जग गिलास में पानी देता है ओकरा बाद पूछता है सर कथी खाइएगा। यहाँ साला सब काम अपने करे और इतना पईसा भी दे। तो ई ललका टीशर्ट वाला कर्मचारी सब को काहे रखे हुए है। मुँह ताकने के लिए। ख़ैर गए वहाँ गए 4 पीस वाला एगो बलटिन(बकेट) आर्डर किये। एगो ठंडा लिए और आ गए अपने टेबल पर। साला पहली बार जिंदगी में टमाटर के चटनी जौड़े मास खा रहे थे। अभी तक भात,रोटी,चुरा-मूढ़ी जौड़े ही खाये थे। खैर जमाना बदल गया है। हर दिन कुछ नया आ रहा है। कल होके मुर्गा का हड्डियो कोनो अंग्रेज़ी नाम के होटल में खाने के लिए लोग लाइन में लग जायेगा तो कोई आश्चर्य नहीं कीजियेगा और पिताइयेगा नहीं।माफ़ कर दीजियेगा।काहे की हमलोग स्वभाव से ही सहिष्णु हैं।😉😉

1 thought on “हमारा पहला KFC दौरा

  1. देखिए न मक्कई के लाबा ,आलु के चिप्स ई सब देहाती खाना कोई गांब मे पुछता नही है ,उहे बरका शहर मे जैसे बम्बई दिली कलकता ई सब शहर मे बिकता है तो उहे आदमी सिना तान के खाता है और कहता है बहुत आच्छा है लेकिन उ बुरबक को ई पता नही है कि ई गाब मे 2 रु मिलता था तो नही खाते थे कहतै थे निम्नन नही लगता है उहे,शहर मे ज्यादा पैसा दे के खा रहै है

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