Snigdha Sneh Archive

Poems

एक कप चाय

बहुत दिनों बाद लौटा हूँ आज बरामदे में बैठा देख रहा हूँ वही पुराना शहर बस उसकी उम्र बढ़ सी गई हो जैसे थोड़ा थका, झुके कन्धे लिए अपने होने का अर्थ टटोलते हुए बदलाव …
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