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Interview

दीक्षा द्विवेदी से साक्षात्कार

लोहे पे दौड़ता लोहा, चिंघाड़ता लोहा, चला जा रहा था …….. सिल्लीगुड़ी से दिल्ली | मैं खिड़की के पास बैठी आश्वासित थी, किंचित मात्रा भी आशंकित नहीं, था जो मेरे पास मेरा कल्पवृक्ष, छाया देने को …
Poems

सीता माँ की मड़ई हैं अपना सीतामढ़ी

सीता माँ की मड़ई हैं अपना सीतामढ़ी.   26.6 ° उत्तर और 85.48° पूर्व,   हाँ ….सही हैं, बिल्कुल सटीक, घबराइए नहीं …मैं कोई भूगोल का प्राध्यापक नहीं … लड़कपन में गया था सीतामढ़ी, अपने …
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