Poems

“औलाद”

“औलाद” मां ने तुमको जन्म दिया,पिता ने संभाला था, दोनो ने मिलकर बड़ा किया, बड़े

“कोना”

घर के कोनों में रहने वाले बच्चे, एक दिन निकल पड़ते हैं, ढूँढने अपना कोना,

सोशल मीडिया

न जाने हम क्या थे और क्या हो गए जो बसा ली है दुनियां,बस उसमें खो गए वक्त ने बदल डाली अपनी चाल है अब लोग फ़ेसबुक पे पूछते हैं क्या आपका हाल है ? सेना लड रही है  सीमा पर जुबानी जंग ट्विटर पर सरेआम है घर में माँ की कदर नहीं ” गौ माता

जिन्दगी

मैने लाख मिन्नते की ज़िंदगी से, मुझे इस तरह आजमाया ना करो, कभी देकर हज़ार

एक कप चाय

बहुत दिनों बाद लौटा हूँ आज बरामदे में बैठा देख रहा हूँ वही पुराना शहर