आइऐ ट्रेन की यात्रा करते है – कुमार आनंद

रेलवे की यात्रा एक कठिन योग–साधना है,इहे साधना के लिए चढे है, संपूर्ण क्रान्ति सुपरफास्ट Exp. New Delhi to Patna, साथ मे राकेश भैया मुखर्जी नगर वाले, धक्कापेल भीड़ के बीच कैसहू घुसे पहिले प्लेटफार्म पर, कुछ देर बाद उद्घोषणा हुई है कि ट्रेन निश्चित समय से है, फिर हम लग गए स्टेशन के सूक्ष्म निरीक्षण मे,
देखिए दुनिया का सबसे सहिष्णु स्थान अगर कोई है तो वो है दिल्ली रेलवे स्टेशन के बाहर वाला परिसर, ईहां पंडित जी अपना ओम और रामरमा वाले गमछा का गांती बांध कर बैठे है, हनुमानजी, काली माई, गणेशजी के फोटो लगा रखे है, उधर तनिके हट के एक मौलवी जी भी हरियरका पियरका कंबिनेशन वाला पोशाक पहिने झारु लेके बैठे है, पंडित जी के साईड से पुरवईया हवा से धूल और कभी-कभी हनुमानजी का फोटो उड़ के मौलवी साहेब के पास आ रहा है, मौलवी जी भी बड़े सम्मान के साथ बजरंगबली के फोटो को उठाकर पंडित जी को दे रहे है, गंगा-जमुनी तहज़ीब का इससे बढ़िया क्या मिसाल देखे.
3-4 गो कुत्ता भी घुम रहा है जीभ निकाले, group मे ई कुकुर सब एकजुट हो कर के हमरा और राकेश भैया को ऐसे देख रहा जैसे 2-3 मिलियन इनाम वाला अलकायदा का आतंकवादी हो, एगो चाची अपना बउआ के डिमांड पर समोसा खरीद के दे रही है, समोसा वाला टूटल समोसा दिया अब उ बउआ खा ही न रहा है, बोल रहा की ई पुरान है, नया देओ, हारकर नया समोसा दिया है, अब उसको पानी चाहिए, पानी पिया, चाची अपन अंचरा(आंचल) मे से 10 के ऐगो नोट मचोराएल मुचराऐल दी है समोसा वाला के, गांव के चाची दादी का ई personal Bank और ATM है, ई ATM पर आरबीआई का नियम कानून न लागू होता है, Demonetisation (नोटबंदी) का भी आंशिक प्रभाव ही ई personal ATM पर पड़ा था. चाची का ट्रेन आज कैंसल हो गया है, पहिले इनकर ट्रेन का घोषणा हुआ था 2 घंटा लेट फिर 2 घंटा पैंतालीस मिनट लेट और अब घोषणा हुआ कि कैंसिल, चाची त ट्रैन के ड्राईवर के गरियाए जा रही है.

एक छोटा-सा भारत है, ई रेलवे स्टेशन। भारत की बहुत सारी भाषाएँ जैसे हिंदी, तमिल, तेलगु, कन्नड़, उड़िया, बंगाली, मलयालम और अंग्रेज़ी हमरे कान के भीतरका पर्दा को टच कर के भागे जा रहा है,

दरअसल इडियन रेलवे और उससे संबद्ध क्षेत्र एक open university है, Patience सिखाने में तो बेजोड़ हैं। फिर से उद्घोषणा हुई है कि ट्रेन प्लेटफार्म पर लग गया है, भाग के आऐ है सीट पकड़े, दरअसल सीट प्राप्त करना बड़ा ही वीरता का कार्य है। ओलंपिक में स्वर्ण पदक पाना आसान है लेकिन सीटवा मिल जाऐ ऐकरा लेल बहुते झोलझाल है, खैर हमर सीट त कन्फर्म है, राकेश भैया तो ट्रेन पर चढते एकदम विजय माल्या के जईसन ओरहना के निश्चिंत से अपर सीटवा पर सोने चले गए, हम तो बकलोल है, ट्रेन अभी खड़ी है जेनरल बोगी के निरीक्षण के लिए आऐ है, इतनी बुरी स्थिति है का कहें पुलिस सब के एक लाईन मे लगाया है एक डंडा सबसे पिछिलका के पिछवाड़े पर जोर से मारा है, इतना स्थितिज उर्जा उत्पन्न हुआ है कि धक्का से आगे वाला चार गो आराम से घुस गया. फिर मारा चार गो फिर अंदर बोगी मे, अद्भुत प्रक्रिया है भाई,अद्भुत तकनीक से अवगत हुए, ठेल ठेल के सबको घुसा दिया, हंसी भी आ रही है लेकिन शर्म भी आ रहा कि बुलेट ट्रैन का सपना हम देख रहे है क्या इसे ignore किया जा सकता है?
7गो आदमी जेनरल बोगी के शौचालय मे है, उसमें से चार गो तो गुटखा चीबा रहा है,

ऐगो बोल रहा कि रे फेकना, रामकिरपलबा कोन बोगी मे चढलउ ह रे, जाऐ दे साले के भतार के, छूट गेल होईहें त ईहां दिल्ली मे ही गीत गईहें.

ई सब ऐपिसोड के बाद अपना सीट पर लौट के आऐ है, ट्रेन खुल चुकी है, अरे का कहे पूरा sleeper जेनरल बन गया है, BPSC का exam है परसों, पूरा मुखर्जी नगर उलट के चहर गया ई संपूर्ण क्रांति मे ही, मेरा सीट भी अब शेयरिंग वाला हो गया, student का मदद करना तो भईया नैतिक कर्तव्य है, सब अपन अपन नोट्स निकाल के पढ रहा है, राकेश भईया तो लग रहे कि किताब घोर के पी जाऐंगे. बगल वाली चाची पराठा-भुजिया और दही बोर बोर के खा रही है, पीछे ऐगो छोटा लईका चिचिया रहा, टीटी के इस बोगी मे चढने की खुफिया जानकारी मिलते ही बिना टिकट वाला सब तो पलायन वेग से भागा है, हम भी कुरकुरे फार के खाना शुरु किऐ है,शेयरिंग कर के सीट पर जिस भाई को बैठाए थे, पूरा पसरे जा रहा है चाईना Dragon की तरह.

खैर, ट्रेन रफ्तार मे है, उम्मीद है कि जिंदा पहुंचा देगा, दरअसल भारतीय रेलें दुर्घटना के लिए विख्यात हैं। दुर्घटनाओं के माध्यम से संभवत: वे देश की आबादी घटाने में भी अपना विनम्र सहयोग प्रदान करती हैं। भारतीय रेलें न होतीं तो भारत की आबादी कब की 1.5 अरब हो चुकी होती। जनसंख्या नियंत्रण में रेलवे की भूमिका अविस्मरणीय है। आदमी एड्‌स से बच सकता है, अस्सी प्रतिशत जलकर भी उसके प्राण वापस लौट के सकता हैं, यहाँ तक कि दिल की रुकी धड़कन भी फकफका के पुरनका जनरेटर के जैसे फिर से चालू हो सकता, पर भारतीय रेलों में सफ़र करने वालों के जान की कोई गारंटी नहीं. खैर जिंदा बचे तो अगला Blog लिखते है 😜😜😂

-- कुमार आनंद (हर हर महादेव)

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