सरस्वती पूजा और आडम्बर – कुमार आनंद


आप सभी को वंसत पंचमी माँ सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनायें, कल से ही what’s up फेसबुक पर दनादन मैसेज प्राप्त हो रहा है, वैसे तो भारतवर्ष में अनेको धर्म के अनेक त्यौहार मनाये जाते है, परंतु मां सरस्वती विद्या की देवी है और वसंत पंचमी का हम विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्व है.
गांव केदारपुर के हम उम्र 10-11 वीं कक्षा में पढ़ने वाले गुडू, सोनू, मोनू, आकाश, चंदन और रौनक ने पिछले साल छठ के समय ही एक प्लान बनाया था कि इस बार जो हो जाए सरस्वती पूजा करना है लोकल पूजा नहीं धाकड़ और दखिनवारी टोला वाला सब को  दिखा देना है कि ई उत्तर वारी टोला में की दम है, पते न है साला जेतना उ सब कमाता है उतना हम तो बाबू के पैसा का उड़ाईए देते हैं, गुड्डू बोला रे उ कृपालबा के डी जे कईसन रहेगा, पिछला बेर उ यादोपुर वाला लईकबा सब लाया था, हम सुने थे गजबे आवाज है, सोनू बोला हां रे ओकर नाम हमभी सुने है गजबे साउंड है, लेकिन इसका पहिले से बुक करना होगा, उस समय डीजे के लेल बड़ा मारा मारी होता है, जे करना है अभी करो, पूरे बजट की तैयारी में जुट गया 3-4 महीना पहिले बच्चन लोग. झट से खुदरिया इकठ्ठा कर कृपाली डीजे से बुक करवा लिया, इनके पूजा का कंपटीशन होने वाला है दखिनवारी टोला के अधेड़ उम्र के मां सरस्वती पुजारियों से, पूजा का ये दौर ही अलग है, बच्चो के लिए उत्साहो का दौर, पंडित जी के लिए रुपया छापने का दौर, साउंड लाईट के व्यापार का दौर etc etc. सब कह सकते है, आस्था काफ़ी पीछे छूट चुका है, बड़ा कारोबार पक्ष जुड़ा है, अरबों का व्यापार अपने देश से नहीं बल्कि चीन से भी जुड़ा है, पूजा से एक महीना पहिले चीन द्वारा इलेक्ट्रॉनिक मूर्ति भेज दिया जाता है, हाथो हाथ बिक जाता है, आज जिस पूजा समिति का लाईट साउंड जितना बढ़िया हो लोग वही आकर्षित होते है. लाइट साउंड को लेकर गजब की प्रतिद्वंद्विता देखने को मिलती है.
खैर, दखिनवारी टोला के पुजारियों की बात करें तो एक टीम है 11-12 लड़कों का कई सालों से इनका समिति बना हुआ है, ये Gazetted or Non Gazetted सारे पूजा का आयोजन करते है, उन में से कई तो 8-10 वर्ष पहिले ही पढ़ाई लिखाई छोड़ चुके है, ऐसा नहीं है कि पूजा करना इनका हक नहीं, लोकतंत्र है भाई, पूजा क्या बैठ के मंत्र जाप करो. खैर, अब किताब उताब से इन सबका कोई वास्ता नहीं, उन्हीं में एक मुंबई में काम करता है, एक किराना दुकान चलाता है और कई पुजारियों को तो गांव के बुजुर्गों द्वारा तो वर्षों पहले निठल्ला घोषित किया जा चुका है, 2-3 का विवाह हो चुका है, अच्छा खासा इनकम है वहीं ई सब का कोषाध्यक्ष है, पूरा वित्त का प्रभार उसी के हाथ में है, सरस्वती पूजा के लिए मुबंई से गांव आ रहा है. उसके आगमन की खुफिया जानकारी बच्चन लोग के समिति के अध्यक्ष को मिली, बच्चन लोग के नई समिति में हलचल मच गया कि कैसे हमारा पूजा हो पाएगा, हम तो उतना पैसा भी नहीं खर्च कर पाएंगे. साउंड लाईट में तो हम पीछे हो जाएंगे. बुंदिया भी ज्यादा बनवाएगा, ई सब हेडेक के बीच पूजा की तैयारी शुरू हो गई, दोनो समितियों के सदस्य एक दुसरे के साथ  इजरायल फिलीस्तीन की तरह व्यवहार किए जा रहा था, चंदा जुटाने की होड़ लग गई अपोजिशन वाला भी एके उ मुंबईए वाला फाईनेंसर पर कैसे निर्भर रहेगा हो, उ भी भीड़ गया चंदा जुटाने में, बच्चन लोग को गांव वाला का अच्छा खासा सपोर्ट मिल रहा है, लोगों को इन बबुओं पर भरोसा है कि यही देश के भविष्य है और गांव वालों को पहले से ही पता है कि निठल्ला लौंडा सब भी पूजा कर रहा है, उनके लिए दुहारी बंद, दिल खोल के ई बच्चन समिति को चंदा मिलने लगा. सुमित्रा चाची जो आज तक दुर्गा पूजा में भी चंदा न दी थी. इन बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए मसूरी के दाल में जो छुपा के रखे थे उहां से निकाल के 201 रुपया दे दी. झट से छोटा सा बैनर बनवा के ले आया, वीणा धारणी पूजा समिति, छोट कॉलम में अध्यक्ष, सचिव , नाम लिखवा लिया. अब अपोजिशन समिति की बात करें तो वो ई बचनिया सबसे बहुत आगे है जी, उ सब का प्लान है कि आर्केस्ट्रा लाया जाए, पिछला बेर बगल के गांव में गया था आर्केस्ट्रा देखे तो इन लोग को आजादी नहीं मिली थी स्टेज पर चढ के महिलाओं पर कमेंट करने का अवसर न मिला था, स्टेज पर चढ़ने और महिलाओं पर फब्तियां कसने के चक्कर में इस समिति के अध्यक्ष, सचिव दूनों को पड़ोस के गांव वाले ने जम के कंबल कुटाई की थी,  ई सब भी टेंशन में है ऑर्केस्ट्रा के लिए तो बड़ा बजट चाहिए भाई, अध्यक्ष बोला, गांव के किसी आदमी ने चंदा न दिया है कोई बात नहीं हम चंदा के लिए अन्य संसाधनों की ओर देखेंंगे और अन्य प्रकार से राशि का इंतजाम करेंगें, रशीद छपवाया, रोड को घेर घेर के लगा चंदा वसूलने, टेंपू, बस, यहां तक की गांव से होकर जाने वाले पशु व्यापारियों को भी धड़पकड़ कर लगा जबरदस्ती चंदा वसूलने. किसी की हिम्मत न हो रही की बिना पैसा दिए आगे निकल जाए. एक टेंपू ड्राइवर बोला की भईया आज कमाई न हुई है, अगले दिन दे देंगे, सब मिल के पीटा सो अलग पिछला चक्का में अपने गुलशन ग्रोवर टाईप जुनियर गुंडा से कांटी भोंकवा के पंचर करवा दिया. बेचारे को मजबूरन देना पड़ा.
मूर्ति लाने का वक्त आ गया, बच्चा लोग का समिति वाला झट से ले आया छोटी सी मूर्ति, साउंड लाईट भी आ गया है, कृपाली डीजे के प्रोपराईटर रामनिहोरा साह जी खुद अपने साज बाज के साथ लैंड किए और शुरू कर दिए गुलशन कुमार और अनुराधा पौडवाल के गीत, पूजा शुरू हो गया, मां की प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा हुआ, आधा घंटा से पंडित जी पता न कथि न कथि मंत्र पढ़े जा रहे है किसी को समझ में न आ रहा, बस सुधा गाय के जैसे लईकन सब गर्दन झुलाए जा रहा, उधर अपोजिशन समिति वाला भी गया मूर्ति लाने के लिए साथ में उधर से ही 6-8 गो साउंड बॉक्स डीजे के लाद उद के पहुंच रहा है, बच्चन समिति ई कंपटीशन में पछुआ गया महराज, सभी होर्न साउंड बॉक्स कृपाली डीजे और बच्चों की समिति की और घुमा दिया, अब तो बच्चा लोग हतोत्साहित हो गया है, खुद का आवाज खुद ही न सुन पा रहा है, अनुराधा पौडवाल क्या गा रही है कोई सुनने वाला नहीं है, दूसरी पार्टी भी मूर्ति लाकर पूजा शुरु किया, किताब मूर्ति के पास रखने की एक परंपरा है शायद किसी पंडित ने कभी कहा था कि मूर्ति के पास किताब रखने से विद्या आती है, इन निठल्लों के पास तो कोई किताब तो है नहीं, मुहल्ले के छोटे-छोटे बच्चों से आग्रह कर किताब रखवाया कि लाओ बे तुम्हेर कितबबा में भी सरस्वती माई घुसिया जाएगी, मां की अराधना के साथ ही साथ शुरू हो गया “हमार अगरबत्ती की धुआं राउर चरनिया में सही सही जाता की ना” टाईप भद्दे भद्दे अश्लील भोजपुरी गीत की तर्ज पर नया भक्ति वाला वर्जन बज रहा हैं,
मुझे वाकई में इन गायको पर बहुत गुस्सा आता है, पता न कहां से ई नमूना गायक सब कुकुरमुत्ता की भांति उपज गया है, हर सीजन पर गाना निकालने के लिए रेडी बैठे रहता है, छठ दिवाली तो ठीक मकर संक्राति, जिउतिया पर्व पर भी ई नमूना सब गाना निकाल देगा, भोजपुरी में अश्लीलता रोकने के लिए कोई सेंसर नहीं है, क्या क्या नाम है गायक का, खेसारी लाल, मसूड़ी लाल, अरहर लाल, उड़ीद लाल, बिल्कुले न हमके सोहाता है. क्या है कि पहले अश्लील गाएगा, उसी गाना का वर्जन चेंज कर भक्ति में कन्वर्ट कर देगा, जिसको जो मन में आया गाना गा दिया, दरअसल लोग सुनते हैं तब तो गाता है, उसी का गाना सब बजाए जा रहा हैं, पूरे लाईट साउंड से समिति चमचम कर रहा है, लोग भले ही चंदा बच्चन की वीणा धारिणी समिति को दिए हो लेकिन भीड़ तो उ बुजुर्गों की समिति में ही जुटी है काहे से ऑर्केस्ट्रा आया है. मां की मूर्ति साईड में पड़ी है, पीछे की ओर पंडाल लगा है, उधर ही ऑर्केस्ट्रा का स्टेज बना है , मूर्ति को अब कोई देखने वाला नहीं है, अगरबत्ती भी जलते जलते कब बुत गया पता न चला, मां सरस्वती अब कोने मे किसी बुजुर्ग की तरह पड़ी है जिसे देखने पूछने वाला कोई नहीं है, सारी निगाहे ऑर्केस्ट्रा में नाचने के लिए बुलाई गई लड़कियों पर टिकी है. ऑरकेस्ट्रा शुरु हुआ, समिति अध्यक्ष, सचिव कहां न कहां से बंदूक ले आए और तड़ातड़ आसमानी फायर शुरु कर दिए, मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति वार्ड सदस्य जी सबको को निमंत्रण मिला था, सभी आए और फरमाइश किए की आंख से छलका आंसू और जा टपका शराब मे,  मुझे नौलखा मंगा दे रे सईयां दिवाने गाओ, फरमाईश पूरा हुआ सरपंचजी और पंचायत समिति जी 2100-2100 थमा दिए, और अपना नाम कम से कम 5 बार माईक में बोलवा के एकदम बड़का राजनेता वाला फीलिंग ले रहे है, शायद किसी गरीब के इंदिरा आवास वाला कमीशन था, एकदम प्रसन्नचित लग रहे है, फिर भोजपूरिया अश्लील गानों का दौर चल पड़ा, इसबार 5001 इनाम. अचानक से जनरेटर बंद हुआ, दनादन पिटाई डीजे वाले की हुई, गांव के जनप्रतिनीधि जिसका सबने खुद चयन किया था, अब पूरे मूड में था, बेचारा फिर से डीजे वाला जैसे तैसे चालू किया, फिर से महफिल बनी और अब ऑरकेस्ट्रा की लड़कियों से छेड़छाड़. पूरी रात यहीं तमाशा, मां सरस्वती पूरे रात इन उदंडों को सहती रही, झेलती रही, उनकी भी इच्छा होती होगी कि कहां मै आ गई, बुलाने को तो बड़ी इज्जत से बुला लिया और अब यहां से जा भी नहीं सकती, चूंकि भक्त-भगवान का प्रेम ही ऐसा है, पूत कपूत भले हो जाए लेकिन मां तो सबको अपने हृद्य से लगा के ही रखती है.
यहीं कहानी है, हर दूसरे-तीसरे पूजा समिति की,हम मूर्ति पूजक है, अच्छी बात है, ऐसा नहीं है कि साधारण तरीके से पूजा नहीं होता, होता है, लेकिन क्या सभी जगह सिंपल सादगीपूर्ण तरीके से पूजा नहीं किया जा सकता? क्या मां सरस्वती इसकी डिमांड करती है कि जबतक  आयोजक एकदमे लाईट साउंड से चमचमा न देगा तब तक तुम्हरे दुआरे पर न आएंगे?  क्या वे कहती है कि जबतक जिला का नं. 1 DJ न लाऐगा तब तक तुम्हरे पास न आऐंगे? क्या पूजा के नाम पर ऑर्केस्ट्रा और उसमें महिलाओं से छेड़छाड़ जैसी गतिविधियों को देख मां सरस्वती के आँखों से आंसू न छलकते होंगे ?
इन समितियों का और उसके निकम्मे, निठल्ले आयोजकों का साल भर का घटना चक्र बने हुआ है, दुर्गा पूजा के बाद लक्ष्मी पूजा,लक्ष्मी पूजा बीतते बीतते सरस्वती पूजा, सरस्वती पूजा बीतते बीतते गणेश पूजा, फिर विश्वकर्मा पूजा.अभी बहुत से नाम और हैं। पूरा वार्षिक कार्यक्रम है इसका।
एक और बात 95% लोगों को तो ये समझ मे नहीं आता कि पंडित जी जो मंत्र पढ रहे उसका अर्थ क्या है, मुझे भी नहीं आता समझ मे, नहीं मैने इसे समझने की चेष्टा की, मुझे लगता कि जो मांगना है मां से direct मांग लूं, मांगता भी हूं आजतक जो मांगा मिला है मुझे, इसमें पंडित जी जैसे agent की क्या आवश्यकता है? लेकिन ये कल्चर है. हम एकाएक बॉयकाट भी नहीं कर सकते न. बॉयकाट करेंगे घर-परिवार समाज वाला सब मिल के हमके ही लतियाएगा, बोलेगा पगला गया है का बे, तू कौन बड़का ज्ञानी है, इसीलिए मै अपनी सोच को अपने तक ही सीमित रखता हूं.
अब मूर्ति विसर्जन की बात करें तो प्रशासन के आदेशों का उल्लंघन करते हुए डीजे के साथ 5-7 किलोमीटर घुमाया जाता है, प्रशासन अगर साथ में है तो उनको चिढ़ाया जाता है, अश्लील गानों पर डांस, जमकर शराब/मादक पदार्थों का सेवन, शर्ट के बटन खोले लड़कियों को छेड़ते ये पुजारी मिल जाएंगे और फिर अगले दिन अखबार की हेडलाईऩ बनती है कि विसर्जन के दौरान दो-चार युवाओं की तालाब/नदी में डूबकर मौत, मारपीट, दंगा वगैरह वगैरह, अगर प्रशासन कहता है कि समिति को पंजीकृत करवाओ  ताकि सब पर जिम्मेदारी तय हो, तो उल्टा उस पर आरोप लगता है कि हमारे धार्मिक कार्यों में प्रशासन का  हस्तक्षेप है, सरकार की तुष्टिकरण की पॉलिसी है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा,
मेरे ख्याल से ऐसी पूजा शर्मनाक और ऐसे पूजा करने वाले व्यक्ति को भी शर्म आनी चाहिए. खैर, सबकी अपनी अपनी सोच है, लोकतंत्र है सोचो और अपने अधिकार का इस्तेमाल करो.
लेकिन, अपने आर्थिक औकातानुसार दिल से आडम्बररहित पूजा से ही हमें सात्विक फल की आकांक्षा रखनी चाहिए.
— कुमार आनंद
आप सबों पर माँ की कृपा सदैव बनी रहे, जय हो. (हर हर महादेव)

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